उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है. उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 2025 से शुरू हुई इस प्रक्रिया के पहले जहां करीब 15 करोड़ 44 लाख मतदाता थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 13 करोड़ 39 लाख 84,792 रह गई है. यानी कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ 4 लाख 39 हजार मतदाता कम हुए हैं.
राज्य में 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया 166 दिनों तक चली. अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक यूपी में 7 करोड़ 30 लाख 71,061 पुरुष और 6 करोड़ 9 लाख 9,525 महिला मतदाता हैं. इससे पहले 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 12 करोड़ 55 लाख 56,025 मतदाता थे, जिसमें 6 करोड़ 88 लाख 43,159 पुरुष और 5 करोड़ 67 लाख 8,747 महिला मतदाता शामिल थे.
ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में करीब 84 लाख 28,767 मतदाता बढ़े हैं. जिलों में प्रयागराज, लखनऊ, बरेली, गाजियाबाद और जौनपुर में ड्राफ्ट के मुकाबले सबसे ज्यादा मतदाता बढ़े. वहीं एसआईआर से पहले की सूची की तुलना में सभी जिलों में मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है.
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जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ में सबसे ज्यादा 9,14,185 (22.89%) मतदाता कम हुए हैं. इसके बाद प्रयागराज में 8,26,885 (17.6%), कानपुर में 6,87,201 (19.42%), आगरा में 6,37,653 (17.71%) और गाजियाबाद में 5,74,478 (20.24%) मतदाता घटे हैं. विधानसभा स्तर पर साहिबाबाद में 3,16,484, नोएडा में 1,83,887, लखनऊ उत्तर में 1,54,710, आगरा कैंट में 1,47,182 और इलाहाबाद उत्तर में 1,45,810 मतदाता कम हुए हैं.
लखनऊ कैंट में सबसे ज्यादा 34.18% की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी भी है. साहिबाबाद में 82,898, जौनपुर में 56,118, लखनऊ पश्चिम में 54,822, लोनी में 53,679 और फिरोजाबाद में 47,757 मतदाता बढ़े हैं. इस पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची को पारदर्शी बनाया गया है.
कई जगहों पर डुप्लीकेट नाम, मृतक मतदाता और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे कुल संख्या में कमी आई है. उन्होंने यह भी कहा कि जिनका नाम अभी सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं. एसआईआर के बाद आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मतदान प्रतिशत 61% से बढ़कर करीब 70% तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है.
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