इस्लामाबाद में शनिवार को होने वाली अमेरिका और ईरान की ऐतिहासिक बातचीत से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाए हैं. ट्रंप ने साफ कहा कि वह किसी भी कीमत पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं होने देंगे. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र बताते हुए चेतावनी दी कि वहां किसी की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान सैन्य रूप से जंग हार चुका हैं और अब हमारा मकसद इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह खोलना है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मुलाकात की अहमियत को दुनिया के सामने रखते हुए इसे ‘मेक-ऑर-ब्रेक’ (करो या मरो) वाली स्थिति बताया है. उनके मुताबिक, यह वार्ता स्थायी युद्धविराम की दिशा में आखिरी और सबसे बड़ा मौका है. पूरे मिडिल ईस्ट की शांति इस बैठक के नतीजों पर टिकी है. पाकिस्तान इस महावार्ता की मेजबानी कर रहा है और उसकी कोशिश है कि लंबे समय से चल रहे इस तनाव का कोई पक्का समाधान निकले.

वहीं, आगे की बातचीत को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सस्पेंस बरकरार रखा है. उन्होंने पिछली अमेरिकी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोग 47 साल से सिर्फ बातें ही कर रहे थे. उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि कल की मीटिंग ही यह तय करेगी कि आगे क्या होगा. ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि यह आखिरी मुलाकात होगी या आगे भी दौर चलेगा, बस इतना कहा कि ‘हमें देखना होगा कि कल क्या नतीजा निकलता है.’

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