अमेरिका और ईरान के सीजफायर को स्थायी बनाने की दिशा में इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो गई है. दोनों देशों के बड़े नेता पाकिस्तान पहुंच चुके हैं. लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत से पहले ही साफ कह दिया है कि वो अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं करते.

बातचीत शुरू होने से पहले ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से फोन पर बात की. इसमें उन्होंने कई अहम बातें कहीं.

पहली बात यह कि ईरान इस बातचीत में ‘पूरी तरह बिना भरोसे के’ जा रहा है. मतलब ईरान अमेरिका पर जरा भी विश्वास नहीं करता. इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने पहले भी कई बार वादे करके तोड़े हैं.

दूसरी बात यह कि ईरान ने सीजफायर इसलिए माना क्योंकि वो एक जिम्मेदार देश की तरह काम कर रहा है. लेकिन ईरान की शर्तें हैं कि जंग पूरी तरह बंद हो, ईरान को हुए नुकसान का हर्जाना मिले और जो लोग इन हमलों के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए. तीसरी बात यह कि ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उसकी शर्तें नहीं मानी गईं तो यह बातचीत टूट जाएगी.

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अमेरिका-ईरान के प्रतिनिधि पाकिस्तान पहुंचे

ईरान की तरफ से एक बहुत बड़ी और ताकतवर टीम इस्लामाबाद पहुंची है. इस टीम की अगुवाई संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबाफ कर रहे हैं. इनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली-अकबर अहमदियान, केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्माती और संसद के कुछ सदस्य भी हैं. यानी ईरान ने सुरक्षा, राजनीति, सेना, अर्थव्यवस्था और कानून सभी क्षेत्रों के जानकारों को साथ भेजा है.

अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिका के क्षेत्रीय दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचे हैं. यानी अमेरिका ने भी अपनी सबसे अहम टीम भेजी है.

इनपुट: प्रेस टीवी

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