एक्ट्रेस राइमा सेन बॉलीवुड स्क्रीन पर फिर वापसी कर रही हैं. अपनी पिछली हिंदी फिल्म, ‘माई’ (2022) के चार साल के गैप के बाद एक्ट्रेस अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट को लेकर काफी एक्साइटेड हैं. एक्ट्रेस का कहना है कि हिंदी इंडस्ट्री में वापस आना हमेशा ही बहुत अच्छा लगता है, लेकिन उन्हें यह मानना पड़ेगा कि इस बार वापसी में थोड़ा ज्यादा समय लग गया.
बता दें कि इंडस्ट्री में राइमा सेन का सफर काफी लंबा रहा है. वह इस समय अपनी पहली फिल्म ‘गॉडमदर’ से डेब्यू के 26 साल पूरे होने का जश्न मना रही हैं और साथ ही हंसल मेहता की फिल्म ‘फैमिली बिजनेस’ की तैयारी भी कर रही हैं, जो इसी साल के आखिर में रिलीज होने वाली है.
राइमा ने क्या कहा?
HT से बात करते हुए अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए राइमा कहती हैं, ‘कई दशक बीत चुके हैं. मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैं कोलकाता में रहने वाली 17 साल की एक लड़की थी और मुझे फिल्म का ऑफर मिला था. उस समय विनय शुक्ला कोलकाता आए हुए थे. वह स्क्रीन टेस्ट ले रहे थे, और उन्होंने मुझसे कहा, ‘यह फिल्म करो, तुम इस रोल के लिए एकदम सही हो.’
वह आगे बताती हैं, ‘उस समय मैं पढ़ाई कर रही थी और शबाना आजमी जैसी दिग्गज एक्ट्रेस के साथ काम करने के नाम से ही मैं बुरी तरह घबरा गई थी. शूटिंग के हर दिन मुझे डर लगता था, लेकिन मैंने खुद से कहा, ‘बस एक बार कोशिश करके देखो. अगर तुम यह नहीं कर पाई, तो फिल्मों में काम मत करना, कुछ और कर लेना.’
राइमा बताती हैं कि उनके माता-पिता, मून मून सेन और भारत देव वर्मा ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि वह और उनकी बहन (एक्ट्रेस रिया सेन) अपना रास्ता खुद चुनें. वह कहती हैं, ‘मेरी मां असल में मेरे माता-पिता ने कभी भी फिल्ममेकर्स से यह नहीं कहा कि हमें किसी भी इंडस्ट्री में बहनों के तौर पर कास्ट किया जाए. बल्कि उनका तो यही कहना था, ‘अगर तुम फिल्मों में आना चाहती हो, तो यह सफर तुम्हें अकेले ही तय करना होगा, प्लीज.’ इसके अलावा, उन्होंने हमें कभी यह नहीं बताया कि हमें क्या करना चाहिए, और न ही वे कभी हमारे साथ सेट पर आए.’
काम लेकर नजरिया बदला
एक्ट्रेस ने कहा आज काम को लेकर उनका नजरिया काफी बदल चुका है. उन्होंने कहा, ‘जब मैं छोटी थी, तो मैं काफी चंचल और बेफिक्र थी. बॉलीवुड में जो भी काम मिलता था, मैं उसे ही चुन लेती थी. लेकिन अब मैं अपने काम को लेकर ज्यादा जिम्मेदार हो गई हूं.’ यह कहने के बाद वह इंडस्ट्री की कुछ कड़वी सच्चाइयों पर भी बात करती हैं. ‘लेकिन मैं यहां रोल्स को लेकर ज्यादा नखरे नहीं कर सकती, क्योंकि बंगाली इंडस्ट्री जैसी रीजनल इंडस्ट्रीज के मुकाबले इस इंडस्ट्री में बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन है.’
नेपोटिज्म पर दिया बयान
फेवरिटिज्म और प्रिविलेज को लेकर चल रही बहस पर एक्ट्रेस ने कहा, ‘मुझे लगता है कि बॉलीवुड में, फेवरिटिज्म और नेपोटिज्म हमेशा से ही एक गरमा-गरम मुद्दा रहा है, लेकिन सच तो यह है कि यहां सिर्फ वही टिक पाता है जो सबसे काबिल हो. मेरा मतलब है कि आप देख ही सकते हैं कि टॉप पर सिर्फ सबसे बेहतरीन लोग ही होते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘जाहिर है, इससे आपको काम मिल सकता है, क्योंकि हमारे माता-पिता और दादा-दादी ने हमारे लिए वह विरासत बनाई है और उसी की वजह से हमें मौके मिलते हैं; लेकिन असली बात यह है कि हम उन मौकों का कितना बेहतरीन इस्तेमाल करते हैं और कैसे टिके रहते है.’
‘सुचित्रा सेन की पोती और मून मून सेन की बेटी होने का बोझ शुरू से मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव डालता था. लोगों की उम्मीदें हमेशा से ही बहुत ज्यादा थीं, लेकिन मैं अपनी पहली ही फिल्म से उनकी तरह नहीं बन सकती थी; इसमें मुझे काफी समय लगा. ‘चोखेर बाली’ के बाद जाकर लोगों ने कहा, ‘ठीक है, तो यह राइमा है और यह एक्टिंग कर सकती है.’
‘अब वह विरासत मेरे लिए एक आशीर्वाद की तरह है; अब लोग मुझे भी जानते हैं और मेरे लिए चीजें काफी आसान हो गई हैं. चीजें, खासकर बंगाली सिनेमा में, काफी बदल गई हैं; लेकिन बॉलीवुड में अभी भी कुछ हद तक वैसी ही हैं. यहां लोग अब भी चाहते हैं कि मैं उस विरासत को आगे बढ़ाऊं, लेकिन मैं यकीनन उससे आगे बढ़ना चाहती हूं.’
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