खेल जगत के लिए एक नया और ऐतिहासिक अध्याय शुरू हो गया है. शुक्रवार को नई दिल्ली में Korfball Premier League (KPL) का भव्य लॉन्च किया गया. यह भारत की पहली प्रोफेशनल लीग है, जो मिक्स्ड जेंडर स्पोर्ट ‘कॉर्फबॉल’ को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है.
इस लीग की सबसे खास बात है इसका विजन- ‘नया खेल, नई सोच’, जिसका मकसद खेल के जरिए जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देना है.
लॉन्च इवेंट की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई. इस मौके पर FCC South Asia के प्रेसिडेंट डॉ. वाएल एस. एच. अव्वाद, KPL के फाउंडर अमनदीप सिंह और कॉर्फबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा मौजूद रहे.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. अव्वाद ने कहा कि अगर क्रिकेट मिडिल ईस्ट में लोकप्रिय हो सकता है, तो कॉर्फबॉल भी भारत में बड़ी पहचान बना सकता है.
8 टीमें इस लीग में लेंगी हिस्सा
KPL के को-फाउंडर पंकज कुमार ने बताया कि पहले सीजन में 8 टीमें हिस्सा लेंगी और बाकी जानकारी जल्द सामने आएगी. स्पोर्टी भारत के डायरेक्टर चंदन कुमार ने कहा कि इस खेल को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है. जब लोग इसे समझने लगेंगे, तो इसकी लोकप्रियता अपने आप बढ़ेगी.
कॉर्फबॉल फेडरेशन की वाइस प्रेसिडेंट निधि शेखावत ने बताया कि यह खेल देश के 26 राज्यों तक पहुंच चुका है और अब प्रोफेशनल लीग बनने से खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलेगा.
25 लाख रुपये है प्राइज मनी
वहीं, पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ी नताशा ने कहा कि यह लीग भारत में जेंडर इक्वालिटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि पहले सीजन के लिए 25 लाख रुपये की प्राइज मनी रखी गई है, जो खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर है.
इस इवेंट में कई भारतीय खिलाड़ी भी मौजूद रहे, जिनमें पूर्व कप्तान नितेश, इंटरनेशनल खिलाड़ी रजत कुमार सैनी और सूरज शर्मा शामिल थे. महिला खिलाड़ियों में अलीशा, तनिष्का गुर्जर और यूरी सेठी ने भी हिस्सा लिया.
KPL को गगनदीप हांडा, अमनदीप सिंह, चंदन कुमार, पंकज कुमार और जारा गढ़ोक जैसे फाउंडर्स ने मिलकर शुरू किया है. इस लीग का मकसद खिलाड़ियों को एक मजबूत प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म देना और खेल में पूरी तरह समानता को बढ़ावा देना है.
क्या है कार्फबॉल
कॉर्फ़बॉल एक अनोखा और तेजी से लोकप्रिय होता खेल है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें पुरुष और महिला खिलाड़ी एक साथ एक ही टीम में खेलते हैं. यह खेल दिखने में बास्केटबॉल और नेटबॉल जैसा लगता है, लेकिन इसके नियम और खेलने का तरीका इसे अलग बनाते हैं.
इस खेल में दो टीमें होती हैं और हर टीम में 8 खिलाड़ी होते हैं- 4 पुरुष और 4 महिलाएं. खेल का मुख्य उद्देश्य गेंद को लगभग 3.5 मीटर ऊंचे खंभे पर लगे बिना नेट वाले बास्केट (कोर्फ) में डालना होता है.
कॉर्फ़बॉल की शुरुआत साल 1902 में नीदरलैंड्स में हुई थी. इसे एक स्कूल टीचर निको ब्रोखुयसेन ने बनाया था, ताकि लड़के और लड़कियां एक साथ खेल सकें और खेल के जरिए समानता (gender equality) को बढ़ावा मिले.
आज कॉर्फ़बॉल दुनिया के कई देशों में खेला जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रतियोगिताएं भी होती हैं. भारत में भी यह खेल धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है और अब प्रोफेशनल लीग के आने से इसे और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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