कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस्लामाबाद में हो रही अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर पाकिस्तान पर तीखा तंज कसा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ जिस तरह की भूमिका पाकिस्तान निभाता है, वैसी भूमिका ‘सिर्फ वही निभा सकता है.’ उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय शांति वार्ता चल रही है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं.
थरूर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस वायरल सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल उठाए, जो उन्होंने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित करते हुए लिखा था. उन्होंने कहा कि इस पोस्ट की भाषा और स्ट्रक्चर से यह संकेत मिलता है कि इसमें वॉशिंगटन की भूमिका हो सकती है. थरूर के मुताबिक, कुछ आरोप ऐसे भी हैं कि यह संदेश खुद वॉशिंगटन ने तैयार किया था, क्योंकि उसमें ‘Draft for Pakistan PM’ जैसा शीर्षक था और भाषा भी अमेरिकी शैली की लग रही थी.
इस दावे को और बल द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट से मिला, जिसमें कहा गया कि शरीफ की अपील अचानक नहीं थी, बल्कि यह व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद एक समन्वित कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा थी. सूत्रों के अनुसार, बयान को जारी करने से पहले व्हाइट हाउस ने उसकी समीक्षा और स्वीकृति भी दी थी, जिससे पर्दे के पीछे गहरे कूटनीतिक तालमेल का संकेत मिलता है.
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को पाकिस्तान की भूमिका को प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर शांति स्थापित होती है, तो यह मायने नहीं रखता कि उसे कौन लाता है. लेकिन अगर शांति प्रयास विफल होते हैं, तो उसके कारणों का गंभीर विश्लेषण किया जाना चाहिए.
इन हालातों में दबाव में आ सकता है पाकिस्तान
उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका को उसके भौगोलिक और सामाजिक कारणों से अलग बताया. पाकिस्तान की ईरान के साथ करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है और वहां बड़ी शिया आबादी रहती है, जिससे इस संघर्ष में उसका सीधा हित जुड़ा हुआ है. थरूर ने कहा कि अगर भविष्य में अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो शरणार्थियों का सबसे बड़ा दबाव पाकिस्तान पर ही पड़ेगा.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश करना चाहता है, तो उसे आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी होगी.
इधर, इस्लामाबाद में हो रही वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची शामिल हैं. यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और हालिया सैन्य घटनाएं शांति प्रयासों को प्रभावित कर सकती हैं.
गौरतलब है कि गहरे मतभेद और अविश्वास के कारण वार्ता करीब पांच घंटे की देरी से शुरू हुई. पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करते हुए उन्हें बातचीत की मेज तक लाने में भूमिका निभाई और इसे त्रिपक्षीय वार्ता बताते हुए सकारात्मक शुरुआत का दावा किया है.
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