अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पाकिस्‍तान में होने जा रही है. इस बीच, जेफरीज की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें उसके लेखक ने पाकिस्‍तान के शेयर बाजार के लिए बड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि भारत के आगे उसका स्टॉक मार्केट कहीं नहीं टिकता है.

जेफरीज के ग्रीड एंड फीयर रिपोर्ट में क्रिस्टोफर वुड ने कहा है कि इस सदी की शुरुआत से लेकर अब तक डॉलर के हिसाब से भारतीय शेयर बाजार ने पाकिस्तानी शेयरों की तुलना में 653 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन किया है. यहां तक कि सितंबर 2024 में IMF के आखिरी बेलआउट इवेंट के बाद से MSCI पाकिस्तान इंडेक्‍स डॉलर की तुलना में 84 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में MSCI इंडिया इंडेक्‍स ने 124 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन किया है.

वुड्स जेफरीज ने भारत पर मामूली ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है. इसने कहा कि IMF के बेलआउट सर्किल के दौरान पाकिस्तान भी एक लाभदायक शेयर बाजार साबित हो सकता है, लेकिन रिस्‍क बना हुआ है. वुड ने कहा कि दो सप्ताह का युद्धविराम ऊर्जा के मामले में कमजोर भारत के लिए अच्छी खबर है.

पाकिस्‍तान का शेयर बाजार अच्‍छा हो सकता है
वुड ने कहा कि हालांकि पाकिस्तान 1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद से अपने अस्तित्व के अधिकांश समय में एक तरह की आर्थिक आपदा रहा है, जिसकी खासियत निर्यात की कमी, बार-बार चालू खाता संकट और कई आईएमएफ कार्यक्रम हैं, लेकिन इसकी परमाणु स्थिति और इसकी विशाल सेना के कारण इसका वास्तविक भू-राजनीतिक महत्व है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अनुमान है कि पाकिस्‍तान के पास करीब 170 परमाणु हथियारों का भंडार है और उसकी सेना में करीब 660,000 एक्विव कर्मी हैं. वहीं आईएमएफ से मिलने वाली राहत अमाउंट के सर्किल के दौरान पाकिस्‍तान एक प्रॉफिटेबल शेयर बाजार भी साबित हो सकता है.

वुड ने कहा कि अगर एआई कैपिटल एक्‍सपेंडेचर इस साल चरम पर पहुंचता है, तो भारत को इससे लाभ होगा, क्योंकि यह रिवर्स एआई व्यापार के रूप में अपनी स्थिति रखता है और यह देखते हुए कि विदेशियों ने पहले ही बड़ी मात्रा में शेयर बेचे हैं, जिसमें इस साल अब तक 18.5 बिलियन डॉलर का नेट वैल्‍यू शामिल है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि निगेविट रिस्‍क नहीं है, एसआईपी रुक जाने से और युद्ध फिर से छिड़ जाने का खतरा बना हुआ है.

भारत का वैल्‍यूवेशन हुआ कम
रिपोर्ट में वुड ने कहा कि 2026 के तीन महीने भारत के लिए एक और निराशाजनक तिमाही साबित हुए, क्योंकि इंडोनेशिया के बाद यह एशिया का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बाजार था. फिर भी, यह भी सच है कि ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से एशियाई और वैश्विक उभरते बाजार दोनों संदर्भों में भारत का प्रदर्शन लगभग स्थिर हो गया है.

जेफरीज ने कहा कि मार्च की शुरुआत से लेकर अब तक, एमएससीआई इंडिया ने एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स और एमएससीआई एसी एशिया पैसिफिक एक्स-जापान दोनों की तुलना में अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में केवल 1.9 प्रतिशत का खराब प्रदर्शन किया है, जबकि 2026 के पहले दो महीनों में इनका प्रदर्शन क्रमशः 16.2 प्रतिशत और 16 प्रतिशत रहा था.

वुड ने आगे कहा कि हाल के महीनों में विदेशी बाजार में आक्रामक बिकवाली के कारण हुई गिरावट भारत के शेयर बाजार का वैल्‍यूवेशन काफी हद तक कम हो गया है. उन्होंने कहा कि निफ्टी का एक साल का फॉरवर्ड पीई अब 18.3 गुना पर है, जो मार्च के अंत में 17 गुना तक पहुंच गया था और यह 2015 से 2020 के बीच चल रहे कोविड बीफोर एवरेज 16.8 गुना के करीब है.

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