‘अमेरिका की अत्यधिक मांगों की वजह से नहीं हुई डील, कूटनीति अब भी जारी’, वार्ता फेल होने पर बोला ईरान – iran blames america excessive demands for islamabad talks failure ntc drmt


अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है. ईरानी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी पक्ष की ‘हद से ज्यादा मांगों’ की वजह से बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. हालांकि, ईरान ने इस ओर भी इशारा किया है कि बातचीत के रास्ते अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने बताया कि शनिवार को शुरू हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई. बकाई की मानें तो दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर सहमत थे, लेकिन 2-3 मामलों पर पेच फंस गया.

बकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि पिछले 24 घंटों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुजपरमाणु मुद्दा, युद्ध का हर्जाना, प्रतिबंध हटाना और पूरी तरह से युद्ध खत्म करने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई.

‘बहुत ज्यादा मांगों और गैरकानूनी शर्तों से…’

बकाई ने कहा, ‘इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विपक्षी पक्ष की गंभीरता, नेक नीयत और ईरान के वैध अधिकारों को मंजूर करने पर निर्भर करती है. साथ ही बहुत ज्यादा मांगों और गैरकानूनी शर्तों से परहेज करने और ईरान के वैध अधिकारों को मंजूर करने पर भी निर्भर करती है.’

वहीं, अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि शांति समझौता नहीं हो पाने की सबसे बड़ी वजह तेहरान का अपने परमाणु कार्यक्रम को न छोड़ना है.

वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना आखिरी और सबसे बेहतरीन प्रस्ताव पेश किया था, जिसे ईरान ने स्वीकार नहीं किया.

‘कूटनीति कभी खत्म नहीं होती’

ईरान की समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, बकाई ने कहा, हमें शुरू से ही एक ही बैठक में समझौते की उम्मीद नहीं करनी चाहिए थी. किसी ने इसकी उम्मीद नहीं की थी.’ भले ही इस्लामाबाद में फिलहाल कोई समझौता नहीं हुआ, लेकिन ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि ‘कूटनीति कभी खत्म नहीं होती.’ इसका मतलब है कि अभी भी दोनों देशों में बातचीत की गुंजाइश बाकी है.

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