‘दशकों की दुश्मनी 21 घंटों में नहीं सुलझेगी’, ईरान-अमेरिका वार्ता फेल होने पर बोले एक्सपर्ट्स – us iran peace talks fail experts suggets uranium enrichment flexibility ntc drmt


इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता फेल हो गई है. ऐसे में दोनों पक्षों की शर्तों को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. आजतक पर बात करते हुए कई एक्सपर्ट्स ने इस वार्ता के फेल होने पर अपनी-अपनी राय दी.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान और अमेरिका की जंग दशकों पुरानी है. इसीलिए इस तरह की तकरार को कुछ घंटों में नहीं सुलझाया जा सकता. वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अगर यूरेनियम संवर्धन पर थोड़ा लचीलापन दिखाए, तो मामला सुलझ सकता है.

(रि) ग्रुप कैप्टन डी.के. पांडेय ने कहा, ‘शायद हम लोग ज्यादा उम्मीद लगाकर थे कि बहुत कुछ होगा. बैकअप माइंड में हम जानते थे कि बहुत प्रगति नहीं होगी. लेकिन इस वार्ता में तीन बातें निकलकर आई है, जो अहम हैं. उन्होंने कहा कि हम उम्मीदें छोड़कर जा रहे हैं. यानी उम्मीद का दीया बुझा नहीं है. जिन 2-3 मुद्दों पर बात बढ़ रही थी, अगर उनकी घोषणा कर दी जाती तो शायद इसमें ईरान पर दबाव बनता.’

होर्मुज पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

अगर अमेरिका हर्जाना भर देता तो क्या ईरान होर्मुज खोलने पर राजी हो जाता? इस सवाल पर डी.के. पांडेय ने कहा, ‘बिल्कुल! जिस तरह ट्रंप ने प्रचार किया कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाकर रहेंगे और ईरान न्यूक्लियर बम नहीं बना पाएगा. इसे बहुत ज्यादा तवज्जो दी गई और इसका ध्रूवीकरण हो गया.  लेकिन ट्रंप इसे लगातार कंट्रोल करते रहे. अब दशकों से चली जा रही लड़ाई का हल 21 घंटे में निकालने की उम्मीद करना बहुत ज्यादा हो जाता है.’

ईरान गारंटी चाहता है कि अमेरिका दोबारा हमले नहीं करेगा. ऐसे में क्या दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी है? इस पर USICF अध्यक्ष डॉ भरत बरई ने कहा, ‘इतनी दुश्मनी हो गई है तो एक बातचीत 21 घंटे में हल नहीं हो सकती. इसीलिए अमेरिका गारंटी दे सकता है क्योंकि रूस तो कोई गारंटी नहीं दे सकता, वो सीरिया में भी कुछ नहीं कर सके, चीन कोई गारंटी नहीं दे सकता.’

समझौते के लिए यूरेनियम संवर्धन अहम मुद्दा

बरई ने आगे कहा, ‘ये जो न्यूक्लियर मामला है उसमें तीन मुद्दे हैं. पहला मुद्दा उनकी मैन्यूफैक्चरिंग सुविधा है, उनके पास जो हाई स्पीड सेंट्रीफ्यूड थे फोर्डो, नटांज और इस्फहान में, वो तो काफी तबाह हो चुके हैं. ईरान बोलता रहा है कि हमारे धर्मुगुरु ने कहा कि हमारे धर्म के खिलाफ है परमाणु बम बनाना. हमें बिजली के लिए न्यूक्लियर चाहिए, तो उसके लिए तो 5 प्रतिशत ही सैच्यूरेशन होना चाहिए. तो क्यों 60 प्रतिशत संवर्धन करना?’

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बरई के मुताबिक अगर ईरान 5 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन पर राजी हो जाए तो बात बन सकती है. उन्होंने कहा, ‘दूसरा ये सवाल है कि उसके पास 460 किलो यूरेनियम 60 प्रतिशत है, अगर वो किसी और देश को दिया जाए, जैसे रूस को दे दे, वो अमेरिका को तो नहीं देंगे. तो इससे भी कुछ हो सकता है.’

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