न कॉलेज, न डिग्री फिर भी 19 साल की उम्र में मिल गई BMW में नौकरी! – bmw job without degree viral post spark debate 19 year old ngix

ByCrank10

April 12, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


आज के समय में जहां अच्छी नौकरी के लिए डिग्री और स्किल बहुत जरूरी होता है, वहीं 19 साल की एक युवती ने कुछ ऐसा दिखाया है कि मानो डिग्री की जरूरत ही नहीं है. बिना किसी डिग्री के उसे सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी बीएमडब्ल्यू में नौकर मिल गई. यह कोई इंटर्नशिप नहीं है बल्कि एक मार्केटिंग पोस्ट है और युवती कहती है कि उसने इस जॉब के लिए आवेदन भी नहीं किया था.

यह घटना एक ऐसे स्किल पर केंद्रित है जिसे कई छात्र अभी भी समझने की कोशिश कर रहे हैं, यानी पर्सनल ब्रांडिंग. यह पूरा मामला 19 साल की कंटेंट क्रिएटर गौरी से जुड़ा हुआ है, जिन्हें BMW में फुल-टाइम पर्सनल मार्केटिंग रोल का ऑफर मिला. कॉलेज से नौकरी पाने के ट्रेडिशनल रास्ते पर चलने के बजाय, गौरी ने ऑनलाइन अपना प्रोफाइल बनाने पर ध्यान दिया. वायरल पोस्ट के अनुसार, लिंक्डइन पर उनके 65,000 से अधिक फॉलोअर्स और इंस्टाग्राम पर 35,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं. लोगों का कहना है कि उनका कंटेंट ही उनका पोर्टफोलियो बन गया. पोस्ट के अनुसार, इस रोल के लिए कम से कम 5 साल की अनुभव मांगा जाता है. लेकिन, गौरी के पास न तो डिग्री थी और न ही कोई कॉर्पोरेट अनुभव. उनकी सबसे बड़ी ताकत थी उनकी मजबूत पर्सनल ब्रांडिंग.

क्या बोली गौरी?

इस ऑफर के बारे में गौरी ने कहा कि मुझे दुनिया के सबसे बड़े कार ग्रुप में से एक से नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन सहयोग करने के लिए नहीं बल्कि एक मार्केटिंग पोस्ट के लिए. वह आगे कहती हैं कि उन्हें एक साथ कई ऑफर मिले. फिर मुझे तीन नौकरी के ऑफर मिले जिनके लिए मैंने अप्लाई भी नहीं किया था.

जब प्रोफाइल बन जाए रिज्यूमे

इस घटना से लोगों को यह समझ आ रहा है कि आने वाले समय में कुछ नौकरियों में हायरिंग के तरीकों में बदलाव होगा. अब सिर्फ डिग्री या कॉलेज का नाम ही सब कुछ नहीं रहेगा. अगर आपकी ऑनलाइन पहचान (जैसे LinkedIn, सोशल मीडिया, पोर्टफोलियो) मजबूत है, तो लोग यह भी देखेंगे कि आप:

  • कैसे सोचते हैं
  • कैसे बात करते हैं
  • क्या नया बना सकते हैं, खासकर मार्केटिंग जैसे फील्ड में,यह चीज कभी-कभी डिग्री जितनी ही जरूरी हो सकती है.

लोगों के मन में उठ रहे हैं कई सवाल

इस पोस्ट के वायरल होते ही जहां कुछ लोग इसे प्रेरणादायक मान रहे हैं, तो वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं. वे पूछ रहे हैं कि क्या यह नौकरी फुल-टाइम थी या सिर्फ कुछ समय के लिए प्रोजेक्ट था? भर्ती की प्रक्रिया असल में कैसी थी? या क्या ऐसा हर जगह हो सकता है या यह सिर्फ एक खास मामला है?

एक ओर बड़ी चिंता यह है कि ऐसी घटनाओं से लोगों को लग सकता है कि अब डिग्री की कोई जरूरत नहीं रही, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. कई लोगों का कहना है कि डॉक्टर,वकील, इंजीनियर जैसे कामों में और कई बड़ी कंपनियों की नौकरियों में अभी भी पढ़ाई और ट्रेनिंग बहुत जरूरी होती है. यानि डिग्री का महत्व अभी भी बहुत जगहों पर बना हुआ है.

क्या आज के समय में ये संभव?

चाहे यह घटना पूरी तरह से सही हो या नहीं लेकिन सोशल मीडिया पर इसने बड़ी बहस छेड़ दी है. आज के समय में करियर पहले की तरह तय और एक जैसे रास्तों पर नहीं चल रहे हैं. कुछ लोगों को अवसर उनके पोर्टफोलियो, ऑनलाइन उपस्थिति और कंटेंट के जरिए मिल रहे हैं, जबकि बहुत से लोग अभी ट्रेडिशनल रास्ते जैसे डिग्री, कॉलेज और कैंपस प्लेसमेंट पर निर्भर हैं. इस घटना में यह भी कहा गया है कि उन्हें किसी ने जानबूझकर नहीं ढूंढा था, बल्कि संयोग से संपर्क हुआ, जो यह दिखाता है कि आज के समय में पहचान और नेटवर्किंग भी बहुत महत्वपूर्ण हो गई है. कुल मिलाकर यह घटना सिर्फ नौकरी पाने की नहीं, बल्कि अपनी एक पहचान बनाने की भी बात करती है और यही आज के समय का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

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