वरुथिनी एकादशी 2026: वरुथिनी एकादशी व्रत आज, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व – वरुथिनी एकादशी 2026 तिथि पूजा विधि मुहूर्त टीवीएसजेड


वरुथिनी एकादशी 2026: आज 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का महापर्व मनाया जा रहा है.  वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को सौभाग्य वाली तिथि माना जाता है.  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त आज के दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप की आराधना करते हैं, उन्हें दस हजार वर्षों की तपस्या के समान फल मिलता है. शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी को बहुत खास स्थान दिया गया है.  माना जाता है कि आज का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है . इस दिन दान-पुण्य करने से मिलने वाला लाभ कन्यादान के फल से भी बड़ा माना गया है.

आज के शुभ मुहूर्त और पारण का समय
आज 13 अप्रैल को पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं.  ज्योतिष गणना के अनुसार आज सुबह 06:12 बजे से लेकर दोपहर 12:20 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है. आज व्रत रखने वाले श्रद्धालु कल, यानी 14 अप्रैल को सुबह 05:56 से 08:30 के बीच व्रत खोल सकते हैं. पारण के समय द्वादशी तिथि का होना अनिवार्य है.

आज की सरल पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें . भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं. उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल और चंदन अर्पित करें. विष्णु जी को खरबूजे या आम जैसे मौसमी फलों का भोग लगाएं. याद रखें, बिना तुलसी दल (पत्ते) के भगवान भोग स्वीकार नहीं करते. वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें , अंत में घी के दीपक से आरती करें.

आज किए जाने वाले विशेष उपाय
अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आज आप ये छोटे उपाय कर सकते हैं:

आर्थिक उन्नति: आज भगवान विष्णु को 11 पीली कौड़ियां चढ़ाएं. अगले दिन उन्हें तिजोरी में रख दें.

पितृ दोष से मुक्ति: आज जल से भरे घड़े का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं. इससे घर में सुख-शांति आती है.

तुलसी पूजन: शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करते हुए 11 परिक्रमा करें.

आज इन बातों का रखें विशेष ध्यान
वरुथिनी एकादशी के नियम काफी कड़े माने जाते हैं. आज के दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें. साथ ही, आज के दिन किसी की बुराई करने, झूठ बोलने या क्रोध करने से बचना चाहिए. यदि व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तो भी सात्विक भोजन ही ग्रहण करें.

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