अनंत अंबानी जन्मदिन समारोह: देश के बड़े और चर्चित बिजनेस परिवारों में गिने जाने वाले मुकेश अंबानी का परिवार अक्सर सुर्खियों में रहता है. हर साल की तरह इस बार भी अनंत अंबानी का बर्थडे चर्चा में है, लेकिन इस बार का अंदाज थोड़ा ज्यादा धार्मिक और अलग देखने को मिला. 10 अप्रैल को उनके छोटे बेटे अनंत अंबानी ने अपना 31वां जन्मदिन मनाया, जो इस बार कुछ अलग अंदाज में नजर आया.
इस खास मौके पर परिवार ने भव्य जश्न भी रखा था, जिसमें एक शानदार और आकर्षक केक भी तैयार किया गया था. वहीं, जन्मदिन को और खास बनाने के लिए भजन और लाइट शो का आयोजन किया गया था. नीता अंबानी समेत पूरे परिवार और मेहमानों ने इस पल को मिलकर एंजॉय किया.

महादेव की भक्ति में डूबे अनंत अंबानी और मुकेश अंबानी

जन्मदिन के बड़े सेलिब्रेशन के बाद मुकेश अंबानी और अनंत अंबानी गुजरात के नागेश्वर ज्योतिर्लिंग में महादेव के दर्शन करते नजर आए. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में दोनों बेटा और पिता भगवान शिव के दर्शन और पूजा करते नजर आ रहे हैं. वीडियो में साफ दिख रहा है कि सबसे पहले अनंत अंबानी शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाए. उसके बाद मुकेश अंबानी ने शिवलिंग पर दूध और चरणामृत चढ़ाते नजर आ रहे हैं. फिर, अनंत अंबानी ने भी शिवलिंग पर दूध चढ़ाया फिर, दोनों ने शिवलिंग की आरती की. आखिरी शिवलिंग पर मुकेश अंबानी ने गुलाब की पंखुड़ियां चढ़ाईं. पूजा के बाद दोनों सिर झुकाकर भगवान से आशीर्वाद लिया.

सादगी में छाए अनंत अंबानी

पहनावे की बात करें तो अनंत अंबानी और मुकेश अंबानी दोनों का लुक काफी सिंपल और ट्रेडिशनल नजर आ रहा है. अनंत अंबानी ने लाल रंग का कुर्ता पहन रखा है और उसके साथ मुंडु पहन रखा है. वहीं, मुकेश अंबानी ने ऑफ-व्हाइट कलर का कुर्ता और पायजामा पहन रखा है.

क्यों खास है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग?

गुजरात के द्वारका में स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसे ‘दारुकावन’ (नागनाथ) के रूप में जाना जाता है. यह पहला स्वयंभू (स्वयं प्रकट) ज्योतिर्लिंग माना जाता है. नागेश्वर का अर्थ है ‘नागों का ईश्वर’. यहां ध्यान करने से अकाल मृत्यु, शत्रुओं और अनजाना भय दूर होता है. इसके अलावा, यहां पूजा करने से कालसर्प दोष, विष (शारीरिक और मानसिक) और सभी प्रकार के पापों व भय से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. यहां की पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने यहां ‘दारुक’ नाम के राक्षस का वध कर भक्तों की रक्षा की थी, इसलिए इन्हें ‘रक्षक शिव’ के रूप में पूजा जाता है.

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