ईरान जंग: क्या ट्रंप ने वेंस को बलि का बकरा बना दिया? – Donald Trump JD Vance Iran war NTC vhrw


ईरान संग अमेरिका के समझौते की कोशिश विफल हो चुकी है. इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराना बयान की चर्चा हो रही है. इस महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के वक्त, ट्रंप ने मजाक में कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता हो जाता है, तो इसका पूरा श्रेय वे खुद लेंगे. ट्रंप ने आगे कहा था कि अगर यह (समझौता) नहीं होता है, तो मैं जेडी वेंस को दोषी ठहराऊंगा.

अब  इस्लामाबाद वार्ता फेल हो चुकी है. जेडी वेंस सोमवार को खाली हाथ घर लौटे. अब सवाल है कि क्या वेंस की मुश्किलें बढ़ेंगी. डोनाल्ड ट्रंपअक्सर अपना रुख बदलते रहते हैं और अपने सहयोगियों को दोषी ठहराते हैं (जैसे उन्होंने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को दोषी ठहराया था), जेडी वेंस पर ईरान के साथ समझौता न कराने का आरोप लगा सकते हैं.

इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद, सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप ने ईरान के मुद्दे पर वेंस को बलि का बकरा बना दिया?

वैसे ईरान की सरकार के साथ बातचीत करना आसान काम नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच आखिरी बड़ा समझौता 2015 का परमाणु समझौता था, जिसे अंतिम रूप देने में बराक ओबामा प्रशासन को लगभग 20 महीने लगे थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने के लिए ट्रंप ने दशकों के अनुभव वाले किसी अनुभवी राजनयिक को नहीं भेजा, बल्कि वेंस को चुना, जो प्रशासन के भीतर ईरान के साथ युद्ध शुरू करने के सबसे मुखर विरोधी थे.

दरअसल, वेंस पर ट्रंप का दांव लगाना बड़ा कदम था. कभी ट्रंप के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने वाले वेंस की वाशिंगटन में फिलहाल स्थिति थोड़ी ढीली पड़ी है.  व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने अमेरिकी समाचार आउटलेट एमएसनाउ को बताया, ‘असल में, वेंस ने अपनी अलग राय रखने वाली सोच की वजह से व्हाइट हाउस के अंदर अपना प्रभाव खो दिया है.’

जहां विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ जैसे व्यक्तियों ने ट्रंप के प्रति समर्पित दिखते हैं. वहीं वेंस का राष्ट्रपति के साथ बार-बार टकराव हुआ है.

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन से वेंस को अलग रखा गया था. ईरान पर हमले का सवाल उठने पर भी वेंस अकेले असहमति जताने वाले व्यक्ति थे.

अब उन्हें इस्लामाबाद में ईरान वार्ता का नेतृत्व करने के लिए भेजा गया, जो शायद उनके करियर का सबसे कठिन काम था. डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने से पहले ट्रंप के धमकी भरे बयानों ने वेंस के काम को शायद और मुश्किल बना दिया.

वेंस को तेहरान के जरिए निशाना बनाएंगे ट्रंप?

ट्रंप पर भले इस युद्ध को जल्द खत्म करने का प्रेशर है. लेकिन वे खुद बातचीत में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे. शनिवार को ही उन्होंने कहा, ‘समझौता हो या न हो, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि हम जीत चुके हैं. हम ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं. हम हर हाल में जीतेंगे. हमने उन्हें हरा दिया है.’

हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौता न होने की जिम्मेदारी वेंस पर होगी, लेकिन उन्होंने मजाक में पीट हेगसेथ पर युद्ध शुरू करने का आरोप भी लगाया है. व्हाइट हाउस ने इस बात को ‘मजाक’ बताकर टाल दिया, लेकिन यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ट्रंप वेंस को बलि का बकरा बना देंगे?

अपने दूसरे कार्यकाल में, ट्रंप कई बार ऐसा कर चुके हैं. इसमें उन्होंने अपने सबसे वफादार साथियों को तब हटा दिया जब नतीजे उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे.

पिछले महीने, उन्होंने गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम, अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को बर्खास्त कर दिया था.

इसके साथ-साथ वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक, एफबीआई प्रमुख काश पटेल और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड सहित कई लोगों के भी पद से हटाए जाने की आशंका है.

हालांकि, उपराष्ट्रपति होने के नाते, वेंस को हटाना इतना आसान नहीं होगा. हालांकि, द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ईरान युद्ध का दोष वेंस पर मढ़कर रिपब्लिकन पार्टी के अंदर उनकी राष्ट्रपति बनने की महत्वाकांक्षाओं को खत्म कर सकते हैं.

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