उत्तर प्रदेश के लखनऊ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 180 रुपये में खरीदी गई जमीन के लिए एक किसान परिवार को 47 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. गोसाईंगंज के बस्तिया गांव निवासी ब्रजेश वर्मा के मुताबिक, उनके पिता स्वर्गीय रामसागर ने साल 1965 में करीब पौने दो बिस्वा जमीन खरीदी थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद इस जमीन पर धोखाधड़ी कर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई.

1973 में हुई फर्जी रजिस्ट्री

बताया गया कि साल 1973 में सह-खरीदार शिवरानी ने कथित रूप से फर्जीवाड़ा करते हुए रामसागर की जगह किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली. इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब एक गवाह ने विवाद के बाद सच्चाई उजागर की. इसके बाद रामसागर ने 1978 में गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर न्याय की लड़ाई शुरू की.

47 साल बाद पक्ष में आया फैसला

मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा. इस दौरान 2003 में रामसागर का निधन हो गया, जबकि 2013 में शिवरानी की भी मौत हो गई. बावजूद इसके, दोनों पक्षों के वारिसों के बीच मुकदमा जारी रहा. आखिरकार दिसंबर 2025 में अदालत ने ब्रजेश वर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर दिया.

180 रुपये की जमीन के लिए खर्चे 16 लाख

हालांकि, कोर्ट का फैसला आने के बाद भी जमीन पर कब्जा मिलने में तीन महीने का समय लग गया. इस लंबी कानूनी लड़ाई में वादी पक्ष को करीब 16 लाख रुपये खर्च करने पड़े. यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और जमीन विवादों की जटिलता को उजागर करता है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *