गैस महंगी, किराया बढ़ा… इतनी सैलरी में कैसे चले घर, नोएडा में प्रोटेस्ट कर रहे मजदूरों का दर्द – noida protest salary hike demands lpg gas room rent price hike overtime duty ntcpkb


दिल्ली से सटे हुए नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मजदूरों का शुरू हुआ आंदोलन हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है. नोएडा के अलग-अलग इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्री मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है. सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, उनका कहना है कि महंगाई के दौर में इतनी कम सैलरी पर गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है.

नोएडा फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में वेतन बढाने की मांग को लेकर मजदूरों का शुरू हुआ  विरोध प्रदर्शन ने पूरे नोएडा को अपनी जद में ले लिया है. फेज-2 व इकोटेक-3 के बाद अब नोएडा सेक्टर-62 और नोएडा सेक्टर 15 में भी श्रमिक सड़क पर उतर गए हैं.

नोएडा में अलग-अलग कंपनियों के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को अचानक हिंसक हो गया. प्रदर्शन कर रहे तमाम मजदूरों से aajtak.in ने बात की. उनकी मांग और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने की वजह को जाना…

नोएडा में मजदूर आंदोलन के पीछे कौन?
नोएडा में मजदूरों का आंदोलन के पीछे रिचा ग्लोबल को माना जा रहा है. रिचा ग्लोबन की एक यूनिट हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित है, जहां पिछले कई दिनों से श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. वहां पर हरियाणा सरकार के वेतन बढ़ोतरी के फैसले के बाद कंपनी प्रबंधन ने 35 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि को मंजूरी दी, जिसके तहत टेक्निकल स्टाफ की सैलरी 20,000 और नॉन-टेक्निकल स्टाफ की सैलरी 15,000 कर दी गई. इसी फैसले के बाद ही नोएडा फेस-2 में स्थित रिचा ग्लोबल की चार अन्य फैक्ट्रियों में कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों ने भी समान वेतन वृद्धि की मांग शुरू कर दी.

नोएडा फेस-2 में रिचा ग्लोबल में ऑपरेटर के पद पर काम कर अनुज कुमार (बदला हुआ नाम) ने भी aajtak.in से बातचीत करते हुए कहा कि हमारी मांग वेतन बढ़ाने की है, यही रिचा ग्लोबल कंपनी हरियाणा की फरीदाबाद युनिट पर अपने कर्मचारियों और मजदूरों का वेतन बढ़ाया तो और नोएडा के कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है? इसी बात को लेकर हम मजदूरों ने जब कंपनी के जीएम से लेकर एचआर तक से बात करते हैं तो उन्होंने हरियाणा के बराबर सामान वेतन देने से मना कर रहे हैं. नोएडा में सिर्फ 361 रुपये ही वेतन में बढ़ाया गया है, जो उचित नहीं है.

महंगी गैस बनी आंदोलन की वजह
अमेरिका और ईरान के साथ चल रही जंग के चलते एलपीजी गैस की किल्लत की मार सबसे ज्यादा मजदूरों को झेलना पड़ रहा है. रिचा ग्लोबल में काम करने वाले सुनील कुमार कहते हैं कि एलपीजी गैस मिल नहीं रही है. 80 रुपये किलो मिलने वाली गैस 400 से 500 रुपये किलो मिल रही है, उसके लिए भी हमे मशक्कत करनी पड़ रही है. हमारे साथ के कई कर्मचारी महंगी गैस खरीद नहीं पा रहे हैं, जिसके चलते वो लोग नौकरी छोड़कर जा चुके हैं. कंपनी हमारे दर्द को समझना तो दूरी की बात है, सुनना भी नहीं चा रही है. आज मजदूरों के सड़क पर उतरने के पीछे गैस की बढ़ी कीमत बड़ी वजह बनी है, क्योंकि इसी सीधी मार हमें उठाना पड़ी है.

इंडिया फेडरेशन ट्रेड युनियन के सचिव जय प्रकाश भी कहते हैं कि रिचा गारमेंट्स ग्लोबल में करीब 20 हजार कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें सिर्फ 11282 रुपये ही वेतन दिया जा रहा है, जो मौजूदा समय की महंगाई को देखते हुए काफी कम है. इस समय रसोई गैस  400  रुपये प्रति किलो मिल रही है और अब बताइए 11283 हजार मासिक वेतन में कैसे गुजारा करें. इसीलिए मजदूर विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं.

मकान का किराया महंगा, पर सैलरी वही
नोएडा में घर का किराया और खाने-पीने की सामानों की कीमत दिल्ली जैसी ही हैं, लेकिन नोएडा में काम करने वाले मजदूरों का वेतन दिल्ली जैसा नहीं है. सिलाई के एक फैक्ट्री में काम करने वाले अनुज शर्मा कहते हैं कि जिस एक कमरे का किराया, 3300 रुपये महीने अभी तक दे रहे थे, उसे मकान मालिक ने अब बढ़ाकर 4500 रुपये महीने कर दिया है. हर खाने पीने का सामान महंगा हो गया है, तेल से लेकर दाल और सब्जी तक महंगी हो गई है, लेकिन हमारी सैलरी पहले वाली ही मिल रही है.

अनुज कहते हैं कि हमारी सैलरी 11,283 रुपये महीने हैं, लेकिन हमें साढ़े 10 हजार ही दिए जाते जबकि हमसे जिस कागज पर वेतन के लिए हस्ताक्षर कराए जाते हैं, उस पर 16000 रुपये लिखे रहते हैं. दस हजार रुपये में क्या नोएडा में रहा जा सकता है, हम बिहार के मधुबनी से आए हैं, इस मंहगाई इतने कम पैसे में हम अपना जीवन-यापन कैसे करें, जितनी सैलरी मिलती है, वो घर से किराए और खाने पीने में चली जाती है.

विरोध प्रदर्शन करने वालों में से एक, सरिता कहती हैं, मैं मदरसन में काम करती हूं. वे हमें कम सैलरी दे रहे हैं. हम ज़्यादा सैलरी चाहते हैं. जब हमने धरने पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया, तो उन्होंने बिना हमारी किसी गलती के हमें पीटा. सिलेंडर, सब्ज़ियां और हर चीज़ महंगी हो गई है. आज जब हम अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध किया, तो हमें पीटा गया. मेरे पैरों पर चोट लगी. मेरी मांग है कि हमें सैलरी के तौर पर 20,000 रुपये दिए जाए. तभी हम नोएडा में अपना गुज़ारा कर पाएंगे.

8 घंटी की ड्यूटी, 10 से 12 घंटे काम
सरिता कहती हैं कि उन्हें 8 घंटे की ड्यूटी है, लेकिन 10 से 12 घंटे काम कराया जाता है. ड्यूटी से अतरिक्त काम करने का अलग से कोई पैसा भी नहीं दिया जाता है.  नोएडा में आज के समय में कम से कम 18 से 20 हजार रुपये तक की सैलरी मिलनी चाहिए, जबकि मौजूदा समय में 11000 और ऑपरेटर को करीब 13500 तक ही वेतन मिल रहा है.  इतने कम पैसे में गुजारा संभव नहीं है, क्योंकि 4000 रुपये तक गैस सिलेंडर का खर्च है और 4000 तक कमरे का किराया देना पड़ता है. बच्चों की पढ़ाई का खर्च अलग से उठाना पड़ता है.

प्रदर्शन के दौरान महिला मजदूर रेखा ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि कंपनी में भारी टारगेट का दबाव रहता है, टॉयलेट जाने तक की इजाजत नहीं दी जाती. बताया कि कंपनी प्रबंधन द्वारा टारगेट पूरा कराने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता है, पानी पीने तक का समय नहीं मिलता और मशीनों के सामने बैठाकर लगातार काम कराया जाता है.

ओवरटाइम मांगने पर गाली-गलौज

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जरा सा विरोध करने पर अधिकारियों द्वारा बदतमीजी और गाली-गलौज की जाती है. उनका कहना है कि 10 से 12 घंटे तक लगातार काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान सही तरीके से नहीं दिया जाता और कई बार सिंगल रेट पर ही काम कराया जाता है.  प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने कहा कि जहां कंपनी के स्टाफ की सैलरी हर साल हजारों रुपये बढ़ती है, वहीं मजदूरों को सिर्फ 100 से 200 का इजाफा मिलता है.

मजदूरों ने साफ कहा कि हमारा अधिकार हमें चाहिए और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. फिलहाल इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन जारी है. इस तरह मजदूरों ने अपने दर्द को बयां किया, उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने वेतन बढ़ाया है, लेकिन यूपी में अभी भी पुराने वेतन पर ही काम करना पड़ रहा है.

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