मेरठ में तलाक के बाद एक अनोखा और चर्चित मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है. एक रिटायर्ड जज ने अपनी बेटी के तलाक के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ घर वापसी कराई, जिसे लेकर अब विवाद और ट्रोलिंग दोनों बढ़ गई है. रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा की बेटी प्रणिता की शादी वर्ष 2018 में शाहजहांपुर निवासी मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी. शादी के बाद दोनों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं रहे और धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया. दोनों का एक बेटा भी है. आखिरकार मामला अदालत तक पहुंचा और हाल ही में दोनों का तलाक हो गया.
तलाक के बाद जब प्रणिता अपने मायके लौटीं, तो उनके पिता ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया. उनका कहना था कि यह कदम बेटी को मानसिक आघात से उबारने और यह संदेश देने के लिए उठाया गया कि बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
हालांकि, वायरल होने के बाद मामला और उलझ गया. सोशल मीडिया पर प्रणिता को लेकर कई तरह की टिप्पणियां की जाने लगीं, जिनमें उनके चरित्र और निजी जीवन को लेकर भी सवाल उठाए गए. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रणिता ने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा कि लोगों को उन्हें जज करने से पहले उनकी पूरी कहानी जाननी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ गलत बातें फैलाई जा रही हैं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है.
‘बेटी की छवि खराब करने की कोशिश’
दूसरी ओर, प्रणिता और उनके पूर्व पति मेजर गौरव अग्निहोत्री के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है. प्रणिता ने अपने पूर्व पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए यहां तक कहा कि उनकी जान को खतरा था. वहीं, उनके पिता ने भी आरोप लगाया कि पूर्व दामाद और उनके परिवार के लोग सोशल मीडिया के जरिए उनकी बेटी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट तक जान की बात
उधर, ससुराल पक्ष ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रणिता और उनके परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और अपने पक्ष में कुछ वीडियो भी सार्वजनिक किए हैं. रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी के समर्थन में अदालत में जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए हैं. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जरूरत पड़ी तो वे अपनी बेटी के अधिकारों की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे.
जब हमने मेरठ के लोगों से इस मुद्दे पर बात की, तो उन्होंने इसे गलत नहीं बल्कि एक पिता की सराहनीय पहल बताया. लोगों का कहना था कि ट्रोल करने वालों को पहले खुद को उस स्थिति में रखकर सोचना चाहिए कि अगर उनके साथ ऐसा होता तो वे क्या करते. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले पर टिप्पणी करने से पहले उसकी पूरी सच्चाई और तथ्य जान लेना जरूरी है.
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