बिहार बाढ़: नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में दिखने लगा है. किशनगंज जिले की प्रमुख नदियां- कनकई, बूढ़ी कनकई और मेची शुक्रवार को उफान पर रहीं. पानी के बढ़ते स्तर ने दिघलबैंक और टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र में तबाही मचा दी है. दिघलबैंक के तेलीभीट्टा, बिहारटोला और भुरलीभिट्ठा जैसे निचले इलाकों में नेपाल से आया पानी घुस गया है, जिससे खेत जलमग्न हो गए हैं.

किसानों के मुताबिक, अचानक पानी भरने से लाखों रुपये की मक्का और सब्जी की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं. ग्रामीणों को अब सरकारी मुआवजे की उम्मीद है, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं.

मानसून से पहले ही मुश्किलें बढ़ीं

दूसरी ओर, राज्य के अन्य जिलों में भी मौसम ने करवट लेना शुरू कर दिया है. गया समेत 9 जिलों का तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया. पूर्वी हवा के प्रभाव से उमस भरी गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है. हालांकि, पटना में बादल छाए रहने और देर शाम बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन इससे विशेष राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

अगले 72 घंटे में मौसम में बदलाव

मौसम विभाग की मानें तो 1 से 3 जून के बीच पटना सहित कई जिलों में बारिश, वज्रपात और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है. वहीं, मानसून के 13 से 15 जून के बीच दस्तक देने की संभावना है.

इस बार ज्यादा मेहरबान रहेगा मानसून

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस साल बिहार में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. जहां औसतन 1024.3 मिलीमीटर वर्षा होती है, इस बार 1137 मिलीमीटर तक बारिश की संभावना जताई गई है. जून के पहले सप्ताह से ही बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं.

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