भारतीय नौसेना हिंद महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने और चीन-पाकिस्तान की नौसेनाओं का मुकाबला करने के लिए तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रही है. जनवरी 2025 तक नौसेना के पास 150+ जहाज और सबमरीन हैं. 2050 तक 200 जहाज और 500 विमान का लक्ष्य है. 2025 में 12 जहाज कमीशन होंगे, जिनमें 3-4 फ्रिगेट्स शामिल हैं. ये जहाज भारत में बने हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की मिसाल हैं.

15 जनवरी 2025 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने INS नीलगिरी (फ्रिगेट), INS सूरत (डिस्ट्रॉयर), और INS वाग्शीर (सबमरीन) का एक साथ कमीशन किया, जो भारत के लिए पहली बार था. अब INS तुशिल और INS तमाल जैसे फ्रिगेट्स नौसेना को और मजबूत करेंगे.

2025 में कमीशन होने वाले फ्रिगेट्स और उनकी खासियत

2025 में कमीशन होने वाले फ्रिगेट्स में INS नीलगिरी, INS तुषिल, INS तमाल, और संभवतः INS हिमगिरी शामिल हैं। इनकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है…

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भारतीय नौसेना फ्रिगेट्स

1. INS नीलगिरी (प्रोजेक्ट 17A, नीलगिरी-क्लास)

  • कमीशन: 15 जनवरी 2025, माजागन डॉक शिपबिल्डर्स (एमडी), मुंबई।
  • वज़न: 6,670 टन
  • लंबाई: 149 मीटर
  • गति: 28 नॉट (52 किमी/घंटा)
  • रेंज: 5,500 नॉटिकल मील (10,186 किमी)
  • इंजन: 2 MAN डीजल इंजन + 2 जनरल इलेक्ट्रिक LM2500 गैस टरबाइन

हथियार

  • 32 बराक-8 सतह-से-हवा मिसाइलें (इजरायल-भारत)
  • 8 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें
  • 127 मिमी मुख्य तोप (BHEL द्वारा निर्मित, पहली बार)
  • टॉरपीडो लॉन्चर और रॉकेट लॉन्चर
  • सेंसर: MF-STAR मल्टी-फंक्शन रडार, कई हवाई और सतह के लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम.
  • हेलिकॉप्टर: चेतक, ALH, सी किंग और MH-60R सीहॉक हेलिकॉप्टरों को ले जा सकता है.

विशेषताएं

स्टील्थ तकनीक, कम रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) और इन्फ्रारेड सिग्नेचर. रेल-लेस हेलिकॉप्टर ट्रैवर्सिंग सिस्टम और विजुअल लैंडिंग सिस्टम. महिला नौसैनिकों के लिए अलग आवास और मेस हॉल. 75% स्वदेशी सामग्री.  ₹4,000 करोड़ प्रति फ्रिगेट. हिंद महासागर में नीली जल (ब्लू वॉटर) मिशनों के लिए, जैसे समुद्री व्यापार की सुरक्षा और पनडुब्बी-रोधी युद्ध.

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भारतीय नौसेना फ्रिगेट्स

2. INS तुशिल (क्रीवाक-III क्लास, तलवार-क्लास का उन्नत संस्करण)

  • कमीशन: 9 दिसंबर 2024, यंतार शिपयार्ड, रूस
  • वज़न: 3,900 टन
  • लंबाई: 125 मीटर
  • गति: 30+ नॉट (56 किमी/घंटा)
  • रेंज: 4,500 नॉटिकल मील (8,334 किमी)
  • इंजन: यूक्रेन के जोर्या-मशप्रोएक्ट से गैस टरबाइन

हथियार

  • 8 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें (450 किमी रेंज).
  • Shtil सतह-से-हवा मिसाइलें.
  • पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो और रॉकेट.
  • मध्यम रेंज की सतह-से-हवा तोप.
  • सेंसर: उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संचार सुइट.
  • हेलिकॉप्टर: कामोव-28 (पनडुब्बी-रोधी) और कामोव-31 (हवाई चेतावनी)

विशेषताएं

ब्लू वॉटर ऑपरेशंस के लिए डिज़ाइन, चार आयामों (हवा, सतह, पानी के नीचे, इलेक्ट्रॉनिक) में युद्ध के लिए सक्षम. रूस से आयातित, लेकिन भारत में दो और (त्रिपुट और तवास्य) बन रहे हैं. ₹8,000 करोड़ (दो फ्रिगेट्स के लिए). समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आतंकवाद और तस्करी रोकना.

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भारतीय नौसेना फ्रिगेट्स

3. INS तमाल (क्रीवाक-III क्लास, तलवार-क्लास का उन्नत संस्करण)

  • कमीशन: जून 2025 (संभावित), यंतार शिपयार्ड, रूस
  • वज़न: 3,900 टन
  • लंबाई: 125 मीटर
  • गति: 30+ नॉट (56 किमी/घंटा)
  • रेंज: 4,500 नॉटिकल मील (8,334 किमी)
  • इंजन: जोर्या-मशप्रोएक्ट गैस टरबाइन

हथियार

  • 8 ब्रह्मोस मिसाइलें (450 किमी रेंज).
  • Shtil सतह-से-हवा मिसाइलें.
  • पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो और रॉकेट.
  • मध्यम रेंज की तोप.
  • सेंसर: उन्नत इलेक्ट्रॉनिक और संचार सिस्टम.
  • हेलीकॉप्टर: कामोव-28 और कामोव-31.

विशेषताएं

INS तुषिल जैसी ही, रूस में निर्मित आखिरी आयातित युद्धपोत. भविष्य में सभी जहाज भारत में बनेंगे. ₹8,000 करोड़ (दो फ्रिगेट्स के लिए). हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में भारत की रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाना.

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भारतीय नौसेना फ्रिगेट्स

4. INS हिमगिरी (प्रोजेक्ट 17A, नीलगिरी-क्लास) (संभावित)

  • कमीशन: 2025 के अंत तक (संभावित), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE), कोलकाता.
  • वज़न: 6,670 टन
  • लंबाई: 149 मीटर
  • गति: 28 नॉट (52 किमी/घंटा)
  • रेंज: 5,500 नॉटिकल मील (10,186 किमी)
  • इंजन: 2 MAN डीजल इंजन + 2 जनरल इलेक्ट्रिक LM2500 गैस टरबाइन

हथियार

  • 32 बराक-8 मिसाइलें.
  • 8 ब्रह्मोस मिसाइलें.
  • 127 मिमी तोप.
  • टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर.
  • सेंसर: MF-STAR रडार.
  • हेलिकॉप्टर: चेतक, ALH, सी किंग, MH-60R.

विशेषताएं

स्टील्थ तकनीक, कम RCS. महिला नौसैनिकों के लिए सुविधाएं. 75% स्वदेशी सामग्री. ₹4,000 करोड़ प्रति फ्रिगेट. INS नीलगिरी जैसा, मल्टी-रोल मिशनों के लिए.

भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता

स्वदेशीकरण: नीलगिरी और हिमगिरी में 75% हिस्से भारत में बने. तुशिल और तमाल रूस से आयातित हैं, लेकिन अगले दो फ्रिगेट्स (त्रिपुट और तवास्य) गोवा शिपयार्ड में बन रहे हैं.

शिपयार्ड: मझगांव डॉक (MDL), गार्डन रीच (GRSE), गोवा शिपयार्ड, और कोचीन शिपयार्ड भारत के मुख्य युद्धपोत निर्माता हैं.

लागत: 2025 में कमीशन होने वाले 12 जहाजों की कुल लागत ₹1.1 लाख करोड़ (US$13 बिलियन) है.

महिला नौसैनिक: नीलगिरी और हिमगिरी में महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए अलग आवास हैं, जो नौसेना की प्रगतिशील नीतियों को दर्शाता है.

प्राकृतिक आपदाओं से संबंध

हिंद महासागर में बाढ़ और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएं भारत के लिए चुनौती हैं. IDMC की रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2024 में भारत में 3.2 करोड़ लोग आपदाओं से विस्थापित हुए. नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स राहत सामग्री पहुंचाने और तटीय निगरानी में मदद कर सकते हैं.



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