देश के आर्थिक विकास की रीढ़ है कृषि : डॉ रामपाल


खोदावंदपुर. कृषि को वर्ष 2047 तक पूर्ण विकसित करने के उद्देश्य से कृषि वैज्ञानिक गांव गांव जा रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों की टीम किसानों से मिलकर उन्हें उन्नत कृषि की नवीनतम तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं. बकरीद के दिन शनिवार को भी कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर, मक्का अनुसंधान केंद्र बेगूसराय एवं डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वैज्ञानिकों की टीम बेगूसराय जिले के तेघड़ा, बेगूसराय और बखरी प्रखंड क्षेत्र के अलग-अलग पंचायतों में किसानों को उन्नत कृषि के गुर बताये. इसकी जानकारी देते हुए खोदावंदपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ राम पाल ने बताया कि खरीफ फसल की उन्नत खेती के लिए किसानों को सबसे पहले खेत की मिट्टी, सिंचाई सुविधा आदि को लेकर फसल कैलेंडर बनवाया जा रहा है. इसके साथ-साथ धान की प्राकृतिक खेती के लिए सीधी बुआई, लेजर द्वारा जमीन का समतलीकरण, ड्रोन तकनीकी, श्री अन्न की खेती, गोबर का सही इस्तेमाल के अतिरिक्त पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन आदि मुद्दे पर किसानों को विस्तार से बताया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जो खाओ पैदा करो और जो पैदा करो वह खाओ के मंत्र का पालन करते हुए किसानों को समेकित कृषि को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में स्थिरता एंव स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किये जा सके. इसमें उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन आदि के लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाएं एवं बैंक लोन आदि के बारे में जागरूक किया जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि कृषि देश के आर्थिक विकास की रीढ है. इसके विकसित होने से ही विकसित देश का सपना साकार हो सकता है. मौके पर सैकड़ों महिला व पुरुष किसान मौजूद थे.

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