बिहार: बिहार के निबंधन कार्यालयों में कागज़ी दस्तावेजों के बोझ को कम करने और सेवाओं को डिजिटल रूप में आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल शुरू हो चुकी है. मध निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने राज्य के सभी 38 जिलों में दस्तावेजों के डिजिटलीकरण का काम प्रारंभ कर दिया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी कार्य की शुरुआत के तहत पहले चरण में वर्ष 1990 से 1995 तक के दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप में संग्रहित किया जाएगा.

पारदर्शी होगी प्रक्रिया

इसके लिए विभाग द्वारा चयनित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कार्य की गति तेज हो और अपलोडिंग में कोई ढिलाई न रहे. इस डिजिटल पहल से न केवल निबंधन कार्यालयों की कार्यप्रणाली अधिक दक्ष और पारदर्शी होगी, बल्कि आम जनता को भी पुराने दस्तावेजों की खोज, प्रमाणन और सत्यापन में काफी सुविधा मिलेगी. अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जीवाड़ा रोकने और सरकारी राजस्व की पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी.

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सेफ रहेगा डॉक्यूमेंट

उत्पाद एवं निबंधन महानिरीक्षक रजनीश कुमार सिंह ने इस कार्य की समीक्षा के दौरान कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड आने वाले समय में न केवल कार्यालय की कार्यक्षमता बढ़ाएगा बल्कि नागरिकों को भी समयबद्ध सेवा मिलेगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों की सुरक्षा और सुगमता, दोनों सुनिश्चित हो सकेगी.

डिजिटलीकरण के इस सफर की शुरुआत ने निबंधन विभाग को एक नई दिशा दी है, जो आने वाले समय में राज्य में पेपरलेस और पारदर्शी प्रशासन की मजबूत नींव रखेगा. समीक्षा बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिला अवर निबंधन संयुक्त अवर निबंधन एवं मुख्यालय में पदस्थापित सभी पदाधिकारियों ने भाग लिया.

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