ईरान से भीषण संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ इयाल जमीर, रक्षामंत्री इज़रायल कैट्ज़, सामरिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर ने गुरुवार रात अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक हाईलेवल मीटिंग की. इस बैठक में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी रक्षामंत्री पीट हेगसेथ भी शामिल हुए.

द येरूशलम पोस्ट के मुताबिक ये बैठक उस समय हुई है जब अमेरिका ये विचार कर रहा है कि क्या वह ईरान के खिलाफ इज़रायल के सैन्य अभियानों में शामिल हो. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे अगले दो हफ्तों में इस बारे में अंतिम फैसला लेंगे कि अमेरिका ईरान के खिलाफ़ हमलों में शामिल होगा या नहीं.

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बातचीत या हमला… क्या है ट्रंप की रणनीति?

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने पत्रकारों को बताया कि ईरान के साथ निकट भविष्य में संभावित वार्ता की संभावना को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप दो हफ्तों में तय करेंगे कि सैन्य कार्रवाई की जाए या नहीं. लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप राजनयिक समाधान में रुचि रखते हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न करे.

अमेरिका की सैन्य तैयारियां

इस बीच तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट की ओर भेजे जा रहे हैं और 10 अमेरिकी सैन्य कार्गो विमान पहले ही US सेंट्रल कमांड के ठिकानों की ओर रवाना हो चुके हैं. ये संकेत है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए सैन्य रूप से तैयार रहना चाहता है.

ट्रंप का फैसला होगा अहम

बता दें कि ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि मैं हमला करूंगा भी, और नहीं भी. अगले हफ्ते बहुत अहम होगा, शायद इससे भी कम समय में फैसला हो जाएगा. इससे पहले यानी 19 जून को ट्रंप ने ईरान पर हमले की योजना को मंजूरी दी थी. लेकिन उन्होंने फाइनल आदेश के लिए रुकने को कहा है. ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ एक अहम बैठक की. उन्होंने कहा कि फाइनल आदेश के बाद हमला किया जाएगा, और इस दौरान उन्होंने यह देखने के लिए कहा कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने के लिए राजी है या नहीं.



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