OBC और ब्राह्मण कार्ड, अनुशासन का पाठ… तीन बागी विधायकों पर एक्शन से अखिलेश यादव ने साधे कई निशाने – Akhilesh Yadav action against rebels expelled mla Samajwadi party pda up assembly elections 2025 ntcpbt


समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीन बागी विधायकों अभय सिंह, राकेश सिंह और मनोज पांडेय को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. यह तीनों विधायक सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ खुलकर खड़े हो चुके थे और सपा के विरोध का कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे. अखिलेश ने सात बागियों में से तीन को सपा से बाहर कर, चार बागियों को फिलहाल जीवनदान देकर पार्टी नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया ही है, इस एक कदम से ई निशाने भी साधे हैं.

सपा की ओर से तीन विधायकों के निष्कासन के पीछे बीजेपी के लिए काम करने, पीडीए के खिलाफ स्टैंड लेने को वजह बताया है. सपा ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर कहा है कि समाजवादी सौहार्दपूर्ण सकारात्मक विचारधारा की राजनीति के विपरीत सांप्रदायिक, विभाजनकारी और नकारात्मकता की राजनीति करने के चलते निष्कासित किया जाता है. ये तीनों ही विधायक किसान, महिला, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा और ‘पीडीए विरोधी’ विचारधारा का साथ दे रहे थे.

सपा ने जिन तीन विधायकों को हटाया है, उसके तर्क दिए हैं और जिन्हें नहीं हटाया, उसकी वजह भी बतायी है. सपा ने कहा कि इन लोगों को हृदय परिवर्तन के लिए दी गई ‘अनुग्रह-अवधि’ की समय-सीमा अब पूर्ण हुई. शेष की समय-सीमा अच्छे व्यवहार के कारण शेष है. भविष्य में भी ‘जन-विरोधी’ लोगों के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं होगा. पार्टी के मूल विचार की विरोधी गतिविधियां सदैव अक्षम्य मानी जाएंगी. जहां रहें, विश्वसनीय रहें.

इस एक्शन के तार 2024 के राज्यसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं. राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने बागी तेवर अपना लिया था और बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था. बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मदान करने वालों में अभय सिंह, राकेश सिंह और मनोज पांडेय के साथ ही राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्या भी शामिल थे. सपा प्रमुख ने अब इस बगावत के करीब डेढ़ साल बाद तीन बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जबकि अन्य चार के खिलाफ निष्कासन का एक्शन नहीं लिया गया है.

अब सवाल उठने लगा है कि आखिर क्या वजह है कि तीन विधायकों को सपा से बाहर किया गया है, लेकिन चायल सीट से विधायक पूजा पाल, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, अंबेडकरनगर विधायक राकेश पांडेय, बिसौली के विधायक आशुतोष मौर्य पर एक्शन नहीं लिया गया?

सपा प्रमुख पर हमलावर थे तीनों विधायक

राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय और अभय सिंह बागी तेवर अपनाने यानी 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद से ही सपा के खिलाफ लगातार बयानबाजी करते आ रहे थे. तीनों विधायक सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ भी बयान दे रहे थे और बीजेपी के पक्ष में खुलकर सियासी बैटिंग करते नजर आ रहे थे.

सपा से निष्कासित किए गए विधायक राकेश प्रताप सिंह ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अखिलेश यादव को बहुत छोटे दिल का इंसान बताते हुए कहा था कि मेरा नई कार खरीदना सपा प्रमुख को पसंद नहीं था. इसके अलावा अभय सिंह और मनोज पांडेय सपा को हिंदू विरोधी तक बता चुके हैं.

सपा के पीडीए पर नहीं पड़ रहा असर

अखिलेश यादव ने उन्हीं तीनों विधायकों को पार्टी से निकाला है, जो सबसे ज्यादा मुखर नजर आ रहे थे. तीनों ही समान्य वर्ग से आते हैं, जिसमें दो ठाकुर और एक ब्राह्मण शामिल हैं. इनके निकाले जाने से सपा के पीडीए फार्मूला (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) पर कोई सियासी  इफेक्ट नहीं पड़ रहा. मनोज पांडेय ब्राह्मण हैं तो अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह ठाकुर यानी क्षत्रिय हैं.

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साल 2027 के यूपी चुनाव में सपा का पूरा फोकस दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटों पर है. इसीलिए अखिलेश यादव ने अपने सात में से उन्हीं तीनों विधायकों को बाहर किया है, जो उनकी राजनीति के एजेंडे में शामिल नहीं हैं. अखिलेश यादव 2024 के आम चुनाव में भी इन्हीं तीनों विधायकों के खिलाफ सबसे ज्यादा हमलावर और मुखर रहे हैं.

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अखिलेश यादव अपनी हर रैली में इन तीनों विधायकों को गद्दार कहते हुए सबक सिखाने की बात कहते रहे. मनोज पांडेय, राकेश प्रताप और अभय सिंह सीएम योगी से लेकर अमित शाह तक के साथ कई दौर की मुलाकातें कर चुके हैं. ये तीनों ही अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी बीजेपी नेता की तरह काम कर रहे हैं. यही वजह है कि अखिलेश ने अपनी पहली कार्रवाई में इन्हें टार्गेट किया है.

पाल-मौर्य-चतुर्वेदी पर अखिलेश मेहरबान

सपा प्रमुख अखिलेश ने चायल विधायक पूजा पाल, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, अंबेडकरनगर विधायक राकेश पांडेय और बिसौली विधायक आशुतोष मौर्य पर एक्शन नहीं लिया तो इसकी भी अपनी वजहें हैं. यह चारो नेता बगावत के बाद पार्टी या पार्टी प्रमुख के खिलाफ बयानबाजी से बचते नजर आए हैं. इन चारों विधायकों ने अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत हमले करने से भी परहेज ही किया है.

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सपा ने तीन विधायकों के निष्कासन के आदेश में कहा भी है कि इन लोगों को हृदय परिवर्तन के लिए दी गई ‘अनुग्रह-अवधि’ अब पूर्ण हुई. शेष की समय-सीमा अच्छे व्यवहार के कारण अभी शेष है. सपा एक तरह से यह मान रही है कि बाकी चार विधायकों का व्यवहार अभी पार्टी और विचारधारा के खिलाफ नहीं हैं.

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अखिलेश यादव अगर सभी सातों विधायकों पर एक्शन लेते तो सपा के पीडीए समीकरण पर भी सवाल उठते, क्योंकि पूजा पाल और आशुतोष मौर्य पिछड़ी जाति से आते हैं. सपा ब्राह्मण और ओबीसी के खिलाफ कार्रवाई करती नहीं दिखना चाहती. दो ओबीसी और दो ब्राह्मणों को जीवनदान देकर अखिलेश यादव ने अपनी पीडीए की राजनीति साधे रखने के साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि पार्टी में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है.



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