Lord Ganesha Arti: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित है. इस दिन लोग घर की खुशहाली और उन्नति के लिए व्रत-उपासना करते हैं. कहते हैं कि विनायक चतुर्थी पर गणपति पूजन से जीवन के सारे कष्टों का निवारण हो जाता है और घर की सुख-संपन्नता बनी रहती है. इस बार आषाढ़ माह की विनायक चतुर्थी 28 जून को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा के दौरान उनकी आरती जरूर पढ़ें.
भगवान गणेश की आरती
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया।
बंजन एक बेटा दे,
निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
आरती के बाद इन मंत्रों का करें जाप
1। ओम गम गणपतिय नामाह
2। ओम वक्रातुंडा महाकाया सूर्यकोटी समप्रभा। हे भगवान, मुझे हर समय मेरे सभी प्रयासों में बाधाओं से मुक्त करें।
3। ओम श्रीम हरीम क्लाइम ग्लौ जीएम गनापातय वर वरडे नामाह:
4। ॐ एकदंतय विडमाहे, वक्रातुनदया धिमाही, तन्नो दांती प्रचोडायत। ::::::
5। ओम हस्ती पिशाची ने स्वाहा लिखें:

