24 जून, 2025 को जापान ने अपनी जमीन पर पहली बार मिसाइल परीक्षण किया, जो उसकी रक्षा रणनीति में एक ऐतिहासिक कदम है. फूजी फायरपावर 2025 अभ्यास के दौरान जापान ने अपनी नई हाइपर वेलोसिटी गाइडेड प्रोजेक्टाइल (HVGP) मिसाइल का प्रदर्शन किया.

यह मिसाइल मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा जापान की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) के मार्गदर्शन में बनाई गई है. इस मिसाइल को उत्तर कोरिया और चीन के बढ़ते सैन्य खतरे के जवाब में विकसित किया गया है. आइए जानते हैं कि HVGP मिसाइल की विशेषताओं, जापान की रक्षा रणनीति और उत्तर कोरिया व चीन के खतरे के कारणों जानते हैं.

जापान का पहला मिसाइल परीक्षण: एक नया युग

जापान ने अपनी शांतिवादी नीति को छोड़ते हुए सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है.  शिज़ुओका प्रान्त के हिगाशी-फूजी प्रशिक्षण क्षेत्र में फूजी 2025 लाइव फायर अभ्यास हुआ. जापान ने HVGP हाइपरसोनिक मिसाइल और टाइप 12 सतह-से-जहाज मिसाइल का प्रदर्शन किया. एशियन मिलिट्री रिव्यू के अनुसार यह HVGP मिसाइल 2018 से विकास के दौर में थी. इसका पहला सफल परीक्षण 2024 में अमेरिका में हुआ.

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जापान ने इस मिसाइल को 2026 तक तैनात करने की योजना बनाई है. यह मिसाइल जापान की रक्षा रणनीति का हिस्सा है, जो उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों और चीन की समुद्री आक्रामकता के जवाब में तैयार की गई है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए F-35B स्टील्थ फाइटर और टोमाहॉक क्रूज मिसाइल जैसे हथियार भी खरीद रहा है.

HVGP मिसाइल: विशेषताएं और ताकत

जापान हाइपरसोनिक मिसाइल

हाइपर वेलोसिटी गाइडेड प्रोजेक्टाइल (HVGP) एक हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो मैक 5 (ध्वनि से पांच गुना तेज) की रफ्तार से उड़ सकती है. इसे मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ने बनाया है. यह जापान की जमीन से हमला करने वाली पहली हाइपरसोनिक मिसाइल है. इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं…

रेंज और गति:

  • ब्लॉक 1: 500 से 900 km की रेंज, जो 2026 तक तैनात होगी.
  • ब्लॉक 2A और 2B: 2027 और 2030 में तैनात होंगी, जिनकी रेंज 2000 km और 3000 km होगी.
  • यह मिसाइल मैक 5 की गति से उड़ती है, जिससे इसे रोकना मुश्किल है. 6440 km/hr की स्पीड से.

लॉन्च और डिज़ाइन

  • HVGP एक 8×8 टैक्टिकल ट्रक पर ले जाई जाती है, जिसमें दो कंटेनराइज्ड मिसाइलें होती हैं.
  • यह सॉलिड-फ्यूल बूस्ट ग्लाइड डिज़ाइन पर आधारित है, जो इसे तेजी से लॉन्च करने और रडार से बचने में सक्षम बनाता है.
  • इसमें सैटेलाइट नेविगेशन और इनरशियल नेविगेशन सिस्टम (INS) है, जो सटीक निशाना लगाने में मदद करता है.

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वारहेड के प्रकार

  • नौसैनिक वारहेड: यह जहाजों को नष्ट करने के लिए है, जिसमें रेडियो-फ्रीक्वेंसी इमेजिंग और डॉप्लर शिफ्ट डेटा से टर्मिनल गाइडेंस होती है.
  • जमीनी वारहेड: इसमें एक्सप्लोसिवली फॉर्म्ड प्रोजेक्टाइल (EFP) वारहेड है, जो जमीनी ठिकानों को नष्ट करता है.
  • तैनाती: HVGP को क्यूशू (दक्षिणी जापान) और होक्काइडो (उत्तरी जापान) में तैनात किया जाएगा, जो चीन और उत्तर कोरिया के करीब हैं.

जापान एक और हाइपरसोनिक मिसाइल, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM) भी विकसित कर रहा है, जो स्क्रैमजेट इंजन से चलेगी और लंबी दूरी तक हमला कर सकती है.

उत्तर कोरिया और चीन का बढ़ता खतरा

जापान की इस नई रक्षा रणनीति की मुख्य वजह उत्तर कोरिया और चीन का बढ़ता सैन्य खतरा है.

उत्तर कोरिया का खतरा

मिसाइल परीक्षण: उत्तर कोरिया ने 2025 में कई मिसाइल परीक्षण किए. रॉयटर्स के अनुसार, 8 मई 2025 को उत्तर कोरिया ने शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया, जो संभवतः निर्यात के लिए थे.

ICBM और परमाणु हथियार: पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (PBS) के अनुसार, उत्तर कोरिया ने 2023 में सॉलिड-फ्यूल ICBM का परीक्षण किया, जो जापान और अमेरिका के लिए खतरा है.

J-अलर्ट चेतावनी: 2023 में उत्तर कोरिया की मिसाइलों ने जापान में J-अलर्ट चेतावनी को सक्रिय किया, जिससे नागरिकों में डर फैला. CBC ने बताया कि एक मिसाइल जापान के ऊपर से गुजरने वाली थी, लेकिन वह समुद्र में गिर गई.

किम जोंग-उन की धमकी: अल जज़ीरा के अनुसार, किम जोंग-उन ने 2025 में अपनी परमाणु ताकत को आक्रामक और व्यावहारिक बनाने की बात कही. जापान ने कहा कि उत्तर कोरिया पहले से कहीं ज्यादा बड़ा खतरा बन गया है.

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चीन का खतरा

सैन्य विस्तार: पेंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास 600 से अधिक परमाणु हथियार और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो जापान और अमेरिका को निशाना बना सकती हैं.

समुद्री आक्रामकता: कैलिबर.एजेड के अनुसार, चीन ने पूर्वी चीन सागर में जापान के हवाई क्षेत्र और जलक्षेत्र में बार-बार घुसपैठ की.

ताइवान पर खतरा: चीन का ताइवान पर दावा जापान के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि ताइवान के पास रयूक्यू द्वीप हैं, जो जापान का हिस्सा हैं. USNI न्यूज ने बताया कि जापान HVGP को इन द्वीपों की रक्षा के लिए तैनात करेगा.

हाइपरसोनिक मिसाइलें: PBS के अनुसार, चीन ने 2017 में पहली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया. अब उसके पास कई हाइपरसोनिक हथियार हैं, जो जापान, हवाई और अलास्का को निशाना बना सकते हैं.

जापान की रक्षा रणनीति: क्यों जरूरी?

जापान की शांतिवादी संविधान (1945 के बाद लागू) उसे केवल रक्षात्मक सैन्य नीति की अनुमति देता है. लेकिन उत्तर कोरिया और चीन के बढ़ते खतरे ने जापान को अपनी नीति बदलने के लिए मजबूर किया. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीन ने जापान के मिसाइल परीक्षणों को शांतिवादी संविधान का उल्लंघन बताया, लेकिन जापान ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम कहा.

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क्यूशू और होक्काइडो में तैनाती

क्यूशू: यह जापान का दक्षिणी द्वीप है, जो चीन के करीब है. टाइप 12 मिसाइल (1000 किमी रेंज) और HVGP यहां तैनात होंगी.

HOKKADO: यह उत्तरी द्वीप उत्तर कोरिया के करीब है. टाइप 88 मिसाइल का परीक्षण 2025 में होक्काइडो में हुआ.

अमेरिका के साथ सहयोग

जापान ने 200 मिलियन डॉलर की डील के तहत अमेरिका से HVGP के लिए उपकरण और सेवाएं खरीदीं. यह डील जापान की रक्षा को मजबूत करेगी. न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, जापान अमेरिका के साथ युद्ध मुख्यालय स्थापित करेगा और F-35B और टोमाहॉक मिसाइलें खरीद रहा है.

स्वदेशी रक्षा उद्योग

जापान अपने रक्षा उद्योग को बढ़ावा दे रहा है. जापान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों और ड्रोन-रोधी लेजर सिस्टम पर काम शुरू किया है. जापान ने उत्तर कोरिया और चीन के हाइपरसोनिक मिसाइलों का जवाब देने के लिए 1000 मिसाइलें तैनात करने का फैसला किया है.

चीन का रिएक्शन

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डेली ने जापान के मिसाइल परीक्षण को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया. TRT ग्लोबल ने बताया कि चीन ने जापानी विमानों के साथ खतरनाक हवाई मुठभेड़ की, जिससे तनाव बढ़ा.

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उत्तर कोरिया की धमकी

रॉयटर्स के अनुसार, उत्तर कोरिया ने 2025 में मिसाइल परीक्षण तेज किए, जिसे जापान ने अपनी सुरक्षा के लिए खतरा माना. अल जज़ीरा ने बताया कि किम जोंग-उन ने अमेरिका और जापान के खिलाफ कठोर जवाब की धमकी दी.

अमेरिका और सहयोगी

जापान ने रेलगन विकसित करने की योजना बनाई, जो हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोक सकती है. भारत ने पाकिस्तान से बरामद PL-15E मिसाइल की जानकारी जापान के साथ साझा की, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई. जापान की मिसाइल तैनाती से पूर्वी चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ सकता है. चीन की 2024 में ICBM परीक्षण ने प्रशांत क्षेत्र में चिंता बढ़ाई.



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