इस फिल्म के लिए इस फिल्म के लिए अंटारीिक्शा शुक्ला, द इंटरेस्ट शुबानशु शुक्ला, आमिर की – शुनभांशु शुक्ला लिस्टिंग टू स्वेड्स सॉन्ग सॉन्ग राही हाइ चल राही हाइ चल राही बॉट, आमिर फिल्म लगान एनटीसीएसएम के लिए जीवंत है।


भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की ऐतिहासिक यात्रा पर निकल चुके हैं. कई दिनों के इंतजार के बाद आज जब शुभांशु, अपने 3 और साथियों के साथ एक्सिओम-4 मिशन पर रवाना हुए तो भारतीयों की आंखें चमचमा उठीं. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचने के लिए शुभांशु को अभी करीब 28 घंटे की यात्रा करनी है. उधर जब शुभांशु का सफर हुआ तो इधर सुपरस्टार शाहरुख खान के फैन्स को खुश होने का एक और मौका मिल गया. दरअसल, अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत में शुभांशु, शाहरुख खान की आइकॉनिक फिल्म ‘स्वदेस’ का गाना ‘यूं ही चला चल राही’ सुन रहे थे.

एक दिलचस्प संयोग ये है भी है कि जहां ‘स्वदेस’ में शाहरुख खान ने नासा के एक वैज्ञानिक का रोल किया था, वहीं शुभांशु जिस मिशन पर निकले हैं उसमें भी नासा का महत्वपूर्ण योगदान है. गाने की बात करें तो ‘यूं ही चला चल राही’ उन हिंदी गानों में से एक है, जो किसी ट्रिप के लिए परफेक्ट माने जाते हैं. मगर क्या आप जानते हैं कि ये गाना असल में शाहरुख नहीं, बल्कि आमिर खान की फिल्म के लिए कंपोज किया गया था?

यात्राओं का एक गीत
‘स्वदेस’ में एक अच्छी खासी जिंदगी जी रहा शाहरुख का किरदार, मोहन भार्गव अपनी दादी की याद में भारत वापस लौटता है. उसका प्लान है कि वो अपनी दादी को साथ लेकर यूएस वापस लौट जाएगा. भारत लौटने पर मोहन जब अपने गांव के लिए सफर शुरू करता है तो रास्ते में उसे एक फकीर मिलता है. इस फकीर के साथ सफर करते हुए उसे रेडियो पर ‘यूं ही चला चल राही’ गाना सुनाई देता है. जावेद अख्तर के लिखे लिरिक्स जिस यात्रा के लिए मोटिवेशन हैं, वो सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने की यात्रा नहीं है. वो एक व्यक्ति के खुद से मिलने की भी यात्रा है. ये एक प्रवासी के अपनी मिट्टी से मिलने की यात्रा भी है और अपने साथ बहुत सारे सबक लेकर आती है.

‘यूं ही चला चल’ गाने में शाहरुख खान, मकरंद देशपांडे (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

‘स्वदेस’ की कहानी में शाहरुख का किरदार वापस सिर्फ कुछ ही दिनों के लिए आता है. मगर यहां लोगों की समस्याएं देखने, उनके हल निकालने और चीजों को ठीक करने में वो इस तरह शामिल हो जाता है कि वो अपनी मिटटी से जुड़ने लगता है. ‘स्वदेस’ के अंत में मोहन भार्गव यूएस से वापस भारत शिफ्ट हो जाता है. इस पूरी यात्रा को जावेद साहब के लिरिक्स जिस तरह दर्ज करते हैं वो एक सूफीयाना सा फील है. इन लिरिक्स को. ए आर रहमान ने अपने संगीत के जादू से इन लिरिक्स को एक ऐसी खूबसूरत धुन में पिरोया था, जिसे लोग आज भी ट्रिप वाले मूड में गुनगुनाने लगते हैं. लेकिन असल में ये धुन रहमान ने किसी और फिल्म के लिए बनाई थी.

‘स्वदेस’ नहीं इस फिल्म के लिए बनी थी धुन
2010 में एक इंटरव्यू में रहमान ने बताया था कि ‘यूं ही चला चल राही’ की धुन उन्होंने असल में कई साल पहले कंपोज की थी. ये धुन उन्होंने तब तैयार की थी जब वो आमिर खान की यादगार फिल्म ‘लगान’ के लिए म्यूजिक कंपोज कर रहे थे. वो ‘लगान’ के एक गाने के लिए ये धुन इस्तेमाल करना चाहते थे, लेकिन उस एल्बम में ये धुन फिट नहीं बैठ रही थी.

‘लगान’ के डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर थे और जब उन्होंने अपनी अगली फिल्म ‘स्वदेस’ पर काम शुरू किया तो फिर से अपने फेवरेट ए आर रहमान को साथ लिया. और इस बार वो धुन रहमान के काम आई जो उन्होंने ‘लगान’ के लिए बनाई थी. ‘लगान’ में ही रहमान के साथ काम कर चुके जावेद अख्तर भी एक बार फिर साथ आए और उन्होंने वो लिरिक्स लिखे जिन्हें अंतरिक्ष में जाते हुए शुभांशु शुक्ला मोटिवेशन के लिए गुनगुना रहे थे.



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