राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले द्वारा संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की वकालत करने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष लगातार RSS और BJP को घेर रहा है. इस क्रम में अब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि RSS-BJP को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए.

दरअसल, गुरुवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि 1976 में आपातकाल (Emergency) के दौरान ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को जबरन संविधान में जोड़ा गया और अब वक्त आ गया है कि इन्हें हटाया जाए. 42वें संशोधन के जरिए जोड़े गए ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द कृत्रिम हैं और उन्हें संविधान से हटाना चाहिए.

इसको लेकर अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “RSS का नकाब फिर से उतर गया. संविधान इन्हें चुभता है क्योंकि वो समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है. RSS-BJP को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए. ये बहुजनों और गरीबों से उनके अधिकार छीनकर उन्हें दोबारा गुलाम बनाना चाहते हैं. संविधान जैसा ताक़तवर हथियार उनसे छीनना इनका असली एजेंडा है.
RSS ये सपना देखना बंद करे. हम उन्हें कभी सफल नहीं होने देंगे. हर देशभक्त भारतीय आख़िरी दम तक संविधान की रक्षा करेगा.”

संविधान नागरिकों के लिए संरक्षण कवच: चंद्रशेखर आजाद

आजाद राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि यह संविधान सभी नागरिकों के लिए एक संरक्षण कवच है. इसमें कोई संदेह नहीं कि 1976 में संशोधन के ज़रिए कुछ शब्द जोड़े गए, लेकिन संविधान की आत्मा कभी किसी पार्टी या विचारधारा की बंधक नहीं रही. बाबा साहब अंबेडकर ने भी कहा था कि अगर संविधान लागू करने वालों की नीयत साफ होगी, तो यह दुनिया का सबसे अच्छा संविधान साबित होगा.





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