उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के महानगर थाना क्षेत्र से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां उत्तर प्रदेश सेतु निगम में संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत विष्णु कांत प्रसाद वर्मा ने 28 जून को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटनास्थल से मिले तीन पन्नों के सुसाइड नोट ने इस आत्महत्या की पीछे की पीड़ा को उजागर कर दिया है.

दरअसल, सुसाइड नोट में विष्णु कांत ने अपनी मौत के लिए सास-ससुर, दोनों साले और एक साले की पत्नी को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपनी पत्नी शालिनी की बीमारी के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन उसे बचा नहीं पाए. पत्नी की मौत के बाद उसकी अंतिम निशानी, उनकी 3 वर्षीय बेटी को भी ससुराल वालों ने छीन लिया.

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विष्णु की मां और बहनों ने बताया कि शालिनी की मौत के बाद उनके ससुराल पक्ष ने विष्णु को अस्पताल में पीटा और पुलिस ने उल्टा विष्णु को ही शांति भंग में जेल भेज दिया. यहां तक कि विष्णु, उसकी मां, बहन और भांजे पर दहेज हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया. जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट था कि शालिनी की मौत बीमारी से हुई है, लेकिन न पुलिस ने सुना, न ही शालिनी के परिजनों ने.

पुलिस की धमकियों और समाज की चुप्पी ने विष्णु को तोड़कर रख दिया. बेटी के बिछड़ने का दर्द उसे भीतर ही भीतर खा रहा था. परिवार वालों का कहना है कि इंसाफ की उम्मीद में दर-दर भटकने वाले विष्णु ने आखिरकार हार मानकर मौत को गले लगा लिया. उसने 28 जून को घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

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