त्रिनिदाद-टोबैगो क्यों है खास? भारतीय मूल के लोगों की 40% आबादी, भोजपुरी बोलने वाली की बड़ी संख्या – PM Narendra modi trinidad and tobago visit, indian diaspora bhojpuri language ntcpan


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा पर हैं और घाना के बाद अब वे त्रिनिदाद और टोबैगो के दौरे पर पहुंच गए हैं. साझी विरासत और प्रवासी संबंधों को मजबूत करने के मकसद से पीएम मोदी कैरेबियाई देश की यात्रा पर गए हैं. साल 1999 के बाद यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है. पीएम मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा भारतीय प्रवासियों के यहां आगमन की 180वीं सालगिरह के मौके पर हो रही है.

भारतीय मूल के राष्ट्रपति और पीएम

भारत के साथ त्रिनिदाद और टोबैगो के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के लिए पीएम मोदी की यात्रा काफी अहम है. त्रिनिदाद और टोबैगो की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी भारतीय मूल की है, इनमें राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू और प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर भी शामिल हैं. पीएम मोदी की यात्रा के दौरान बड़े प्रवासी संपर्क कार्यक्रम की योजना बनाई गई है, ताकि कैरेबियाई देश के साथ संबंधों को और मजबूती मिल सके.

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अपने दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्रपति कंगालू और प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे. साथ ही फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल इंफ्रा, रिन्यूएबल एनर्जी और एग्रीकल्चर सेक्टर पर बातचीत होगी. पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद के जॉइंट सेशन को भी संबोधित करेंगे. इस यात्रा के जरिए कैरीकॉम और स्मॉल आइलैंड डेवलपिंग स्टेट्स में अहम देश के साथ भारत की साझेदारी को मजबूत करना है.

बिहार और यूपी से कनेक्शन

त्रिनिदाद और टोबैगो ऐसा कैरिबियाई द्वीप देश है, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए दुनियाभर में मशहूर है. भारतीय मूल की बड़ी आबादी के साथ यहां के ज्यादातर लोग भोजपुरी बोलते हैं, क्योंकि उनकी जड़े बिहार और आसपास के राज्य से जुड़ी हैं. इसके अलावा यहां महापर्व छठ से लेकर होली, दीवाली और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं. इसके अलावा रामलीला जैसे उत्सव भोजपुरी परंपराओं से प्रेरित हैं. रामलीला का आयोजन त्रिनिदाद में भव्य रूप से किया जाता है, जिसमें भोजपुरी स्टाइल के नाटक शामिल हैं, जो कि भारतीय संस्कृति से जुड़ाव की कहानी बयां करते हैं.

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त्रिनिदाद का चटनी म्यूजिक या चटनी सोका भोजपुरी लोक संगीत और कैरिबियाई म्यूजिक का मिक्चर है, जिसमें भोजपुरी गीतों की धुनें और स्थानीय सोका/कैलिप्सो स्टाइल का समावेश होता है. कैरेबियन क्षेत्र में त्रिनिदाद और टोबैगो एक प्रमुख आर्थिक केंद्र होने के साथ-साथ तेल और प्राकृतिक गैस के मामले में काफी समृद्ध है. इसके अलावा पर्यटन के लिहाज से यहां के खूबसूरत समुद्र तट और कोरल रीफ लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान हुआ था भारतीयों का पलायन (getty images)

भारत से ‘गिरमिटिया’ मजदूर गए

19वीं सदी में जब ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासन के तहत गुलामी खत्म हुई, तो श्रम की कमी को पूरा करने के लिए भारत से मजदूरों को त्रिनिदाद लाया गया. साल 1845 से 1917 के बीच करीब डेढ़ लाख भारतीय मजदूर त्रिनिदाद आए, जिन्हें ‘गिरमिटिया’ मजदूर कहा जाता था. इनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार से ताल्लुक रखते थे और जिनकी जुबान भोजपुरी थी. इन मजदूरों को मुख्य तौर पर चीनी और कोको के बागानों में काम करने के लिए लाया गया था. समय के साथ-साथ देश का विकास हुआ और इस समुदाय ने भी अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत की.

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त्रिनिदाद और टोबैगो की कुल आबादी 14 लाख के करीब है, जिनमें से तीन से चार लाख लोग ऐसे हैं जो भोजपुरी बोलते हैं. हालांकि पलायन के इतने वर्षों बाद आज भोजपुरी भाषा का इस्तेमाल कम हो गया है और भारतीय मूल के लोग अब अंग्रेजी या स्थानीय क्रेओल भाषा बोलते हैं, फिर भी भोजपुरी संस्कृति का असर वहां के गीतों, लोक कथाओं और परंपराओं में देखने को मिलता है.

ताकतवर है भारतीय समुदाय

भारतीय मूल के नेताओं का त्रिनिदाद और टोबैगो की राजनीति में काफी अहम योगदान रहा है. बासदेव पांडे देश के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री थे, जो कि 1995 से 2001 के बीच दो बार इस पद पर रहे. बासदेवी पांडे पेशे से वकील, अर्थशास्त्री और यूनियन नेता थे, जिन्होंने यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस सहित तीन राजनीतिक दलों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी.

त्रिनिदाद की मौजूदा प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर भी भारतीय मूल की हैं और उन्होंने अप्रैल में यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव जीतकर पीएम मोदी संभाला है. इससे पहले वह 2010 से 2015 तक त्रिनिडाड और टोबैगो की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं.

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