केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने छत्तीसगढ़ में श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए मनचाही रिपोर्ट देने के लिए 55 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में 3 डॉक्टरों समेत कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद एक बार फिर रावतपुरा महाराज सुर्खियों में आ गए हैं.

दरअसल, रावतपुरा सरकार के नाम से मशहूर रविशंकर महाराज इस मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन भी हैं. आखिर कौन हैं रावतपुरा सरकार और कैसे मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की बड़ी हस्तियां इनके आशीर्वाद के लिए जाते हैं? यह समझने की कोशिश करते हैं.

रविशंकर महाराज कैसे बने रावतपुरा सरकार!
दरअसल, रावतपुरा सरकार की प्रसिद्धि की शुरुआत भिंड के लहार स्थित उनके आश्रम की वजह से हुई. जहां रावतपुरा सरकार का यह आश्रम एक प्राचीन हनुमान मंदिर के पास स्थित है. रावतपुरा में हर रोज हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं.

यहां संत ही ‘सरकार’ हैं!

रविशंकर महाराज का जन्म बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले के छिपरी गांव में हुआ था. इनका बचपन काफी आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरा. आगे चलकर उनके माता-पिता ने रविशंकर महाराज का दाखिला ओरछा के रामराजा संस्कृत विद्यालय में करवा दिया ताकि वो पुरोहित का काम सीख सकें, लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा और वो पढ़ाई बीच में ही छोड़कर रावतपुरा गांव पहुंच गए और यहां स्थित हनुमान मंदिर में साधना शुरू कर दी.

मंदिर में प्राप्त हुईं सिद्धियां

स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी मंदिर में रविशंकर महाराज को सिद्धियां प्राप्त हुईं और उन्होंने अपना दरबार लगाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे मंदिर में रविशंकर महाराज को मानने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी, पर वहां जगह की कमी को देखते हुए बात में रावतपुरा धाम की स्थापना की गई, जहां एक विशाल आश्रम बनाया गया.

ट्रस्ट बनने के बाद शुरू हुआ स्कूल और अस्पताल खोलने का सिलसिला
साल 2000-2001 में रविशंकर महाराज ने रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट बनाया जिसके तहत मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई स्कूल और अस्पताल खोले गए. यही नहीं, इसी ट्रस्ट के अधीन रावतपुरा सरकार के कई आश्रम, संस्कृत स्कूल, नर्सिंग कॉलेज, ब्लड बैंक, फार्मेसी कॉलेज और रायपुर में रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज भी है. यही नहीं, छत्तीसगढ़ के बस्तर में रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी समेत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और यूपी में कई शिक्षण संस्थान हैं.

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