अमेरिकी राष्ट्रपति पर खतरे की स्थिति में कौन-सी एजेंसी होती है सबसे पहले एक्टिव? ईरानी धमकी के बाद देश सतर्क – white house security gaps amid khamenei advisor iran threat to donald trump ntcpmj


अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स समेत वहां के वैज्ञानिकों को भी निशाना बनाया था. इसके बाद से तेहरान में डोनाल्ड ट्रंप को लेकर नाराजगी है. हाल में उन्हें धमकियां मिलीं कि वे फ्लोरिडा स्थित अपने निजी आवास में भी सुरक्षित नहीं. हालांकि ट्रंप अब फ्लोरिडा की बजाय वॉशिंगटन शिफ्ट हो चुके, जहां वाइट हाउस में एक नहीं, कई-कई एजेंसियां राष्ट्रपति की सिक्योरिटी पक्की करती हैं, इसके बाद भी यहां कई बार चूक हो चुकी.

अभी किस नेता ने दी धमकी

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के करीबी जावेद लारीजानी ने एक टीवी इंटरव्यू में ट्रंप को खुली धमकी दे दी. उन्होंने कहा कि ट्रंप जब मार-ए-लागो में धूप सेंक रहे होंगे तो एक छोटा ड्रोन उनपर गिर सकता है. इसमें कोई मुश्किल नहीं.

यह स्टेटमेंट ऐसे समय में आया है जब एक क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म पर खामेनेई का मजाक उड़ाने या उन्हें धमकाने वालों के खिलाफ एक्शन के लिए पैसे जमा किए जा रहे हैं. ब्लड पैक्ट नाम से क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ने दावा किया कि उसके पास इसके लिए भारी रकम जमा भी हो चुकी, जिसका घोषित-अघोषित मकसद ट्रंप को नुकसान पहुंचाना है.

ट्रंप को धमकी भले ही उनके निजी घर के लिए मिली, लेकिन वे अभी परिवार समेत वाइट हाउस में रह रहे हैं. वॉशिंगटन डीसी स्थित ये जगह दुनिया की सबसे सिक्योर इमारतों में आती है, जहां 18वीं सदी से अब तक तमाम राष्ट्रपति रहते आए. यहां सुरक्षा पक्की करने के लिए इतने उपाय किए गए कि पंक्षी भी पर मारे तो पता लग जाए. इसके बाद भी सिक्योरिटी ब्रीच होती रही.

डोनाल्ड ट्रम्प फोटो रायटर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान से लगातार धमकियां मिल रही हैं. (Photo- Reuters)

पहले जानते हैं, किस तरह का बंदोबस्त वाइट हाउस को वाइट हाउस बनाता है.

इमारत और उसके आसपास का लगभग 15 मील का हिस्सा नो-फ्लाई जोन में आता है, जहां कोई भी हवाई जहाज या ड्रोन बगैर इजाजत नहीं उड़ाया जा सकता. अगर कोई विमान नियम तोड़े, तो उसे यूएस एयरफोर्स तुरंत पकड़ सकती है. अलग-अलग हिस्सों में मिसाइल लॉन्चर लगे हुए हैं, जो जरूरत पड़ने पर किसी भी उड़ती चीज को साध सकते हैं.

वाइट हाउस की छत पर खास रडार लगे हैं जो पूरे इलाके की निगरानी करते हैं. इसके चारों तरफ लगे इन्फ्रारेड कैमरे इतने सेंसिटिव हैं कि अगर कोई ऑब्जेक्ट जरा भी ठंडा या गर्म लगे या कुछ असामान्य लगे तो तुरंत अलर्ट करते हैं.

चारों तरफ लोहे की मजबूत फेंसिंग है, जो लगभग 7 फीट ऊंची है. इसके नीचे क्रैश रेसिस्टेंट कंक्रीट है ताकि कोई गाड़ी नुकसान पहुंचाने के इरादे से आए भी तो इमारत को कोई नुकसान न हो सके. कुछ साल पहले फेंसिंग की ऊंचाई 10 फीट कर दी गई, और उनमें भी सेंसर लगाए गए.

इमारत की खिड़कियां बुलेट-प्रूफ हैं. इसके अलावा, बिल्डिंग के ईस्ट और वेस्ट विंग के नीचे दो बेहद अहम जगहें बनी हैं, जहां हमले की स्थिति में भी राष्ट्रपति और उनका परिवार सुरक्षित रह सकता है और वहीं से जरूरी निर्देश दिए जा सकते हैं.

वैसे तो आम लोग भी इस इमारत को देख सकते हैं लेकिन  इसके लिए कड़े नियम और उतनी ही तगड़ी जांच भी है. विजिटर्स को लगभग तीन हफ्तों पहले से बुकिंग करानी होती है, जिस बीच कई दस्तावेज भी चेक होते हैं.

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कई एजेंसियां तालमेल बिठाकर इमारत की सुरक्षा करती हैं. (Photo- Pixabay)

वाइट हाउस और राष्ट्रपति की सुरक्षा एक नहीं, बल्कि कई एजेंसियों के साझा ऑपरेशन का हिस्सा होती है.हर एजेंसी का काम अलग होता है लेकिन मुख्य जिम्मेदारी सीक्रेट सर्विस की होती है.

– यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस सीधे तौर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और उनके परिवार की सुरक्षा करती है. इमारत के अंदर और आसपास इसके एजेंट तैनात होते हैं. ये लोग सिविल ड्रेस में भी होते हैं.

– फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के हिस्से इमारत के ऊपर और आसपास का हवाई क्षेत्र देखना है. वो नो-फ्लाई जोन पर नजर रखता है. किसी भी संदिग्ध हवाई गतिविधि की सूचना तुरंत आगे भेजी जाती है.

– नॉर्थ अमेरिकन एसोस्पेस डिफेंस कमांड का काम यहां आता है. यह वाइट हाउस ही नहीं, पूरे देश के हवाई क्षेत्र की निगरानी करता है.

– किसी साजिश, खतरे, या आतंकी योजना की बात सुनाई दे तो एफबीआई जांच और कार्रवाई करती है. साइबर हमलों की जांच भी इसी के पास है.

– यूनाइटेड स्टेट्स कैपिटल पुलिस का काम रैली, प्रदर्शन के दौरान नजर रखना है. वाइट हाउस के आसपास के पार्क और सड़कों की जिम्मेदारी लोकल पुलिस और पार्क पुलिस की है.

आमतौर पर राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के लिए एक वक्त पर 300 एजेंट्स तैनात होते हैं. वहीं पूर्व लीडर के लिए भी 80 से 100 एजेंट्स होते हैं. वहीं ट्रंप की बात करें तो वे काफी कामयाब बिजनेसमैन रह चुके हैं, जिनके पास अपनी निजी सुरक्षा भी रही. इस बारे में निश्चित जानकारी कहीं नहीं कि ट्रंप की प्राइवेट सिक्योरिटी कैसे काम करती है, और उसमें कितने लोग शामिल हैं.

बराक ओबामा फोटो एपी
बराक ओबामा के कार्यकाल में वाइट हाउस में बड़ी सुरक्षा चूक हुई थी. (Photo AP)

इतनी पक्की सुरक्षा के बाद भी वाइट में सिक्योरिटी ब्रीच होती रही है. लेकिन सबसे बड़ी घटना साल 2014 की मानी जाती है, जब इराक युद्ध का एक पूर्व सैनिक भीतर तक चला आया. उसने न केवल फेंसिंग लांघ ली और मेन डोर तक चला गया, बल्कि अंदर भी जा चुका था. वो भी ग्रीन रूम में, जहां आमतौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस या फिर विदेशी मेहमानों से राष्ट्रपति की मुलाकात होती है. आखिरकार एक सीक्रेट सर्विस एजेंट उसपर काबू पा सका. पूर्व सैनिक के बारे में कहा गया कि वो युद्ध के बाद के ट्रॉमा से गुजर रहा था. उसकी जेब में चाकू भी मिला. हालांकि उसका कहना था कि वो राष्ट्रपति को सचेत करने आया, किसी का नुकसान करने नहीं.

तब बराक ओबामा की सरकार थी. घटना में वैसे किसी का कुछ नुकसान नहीं हुआ लेकिन ये पता लग गया कि वाइट हाउस उतना भी अभेद्य नहीं, जितना सोचा जा रहा था. आनन-फानन कई इस्तीफे हुए, जिसमें सीक्रेट सर्विस के अफसर भी शामिल थे. इसके बाद ही फेंसिंग की ऊंचाई 7 से बढ़ाकर 10 फीट से कुछ ज्यादा कर दी गई, साथ ही सेंसर लगवाए गए जो किसी भी दबाव या तापमान को पकड़ सकें.

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