क्या भारत से बैर की साझा जमीन साथ लाएगी बांग्लादेश और पाकिस्तान को, चीन क्यों डाल रहा खाद-पानी? – bangladesh pakistan china alliance why threat to india ntcpmj


इन दिनों भारत के कई पड़ोसियों से संबंध खराब चल रहे हैं. पाकिस्तान से तनाव तो सदाबहार था ही, शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश भी भड़कने लगा. चीन इन दोनों से एक कदम आगे है. वैसे तो पाकिस्तान और चीन ऑल-वेदर दोस्त होने का दावा करते थे, लेकिन धीरे-से इस दायरे में ढाका भी आ रहा है. इसी गठजोड़ पर चीफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने चेताया कि ऐसा हुआ तो देश पर भारी असर होगा. लेकिन दुश्मनी निभाने के लिए हुई दोस्ती आखिर कितनी टिकाऊ होगी और ये दोस्ती हो भी पाएगी या नहीं!

अक्सर कहा जाता है, तीन तिगाड़ा- काम बिगाड़ा. तीन लोग या तीन विचार जहां भी मिलते हैं, कुछ न कुछ गड़बड़ हो जाती है. यही बात देशों के मामले में भी लागू होती है. चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश इन दिनों भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी में जुटे हैं. इसके लिए जरूरी है कि तीनों ही एक जमीन पर हों, लेकिन इसमें कुछ न कुछ कमी पड़ रही है, जो कि देश के पक्ष में ही है.

पाकिस्तान और बांग्लादेश, यही वो रिश्ता है जो तिकड़ी को सबसे कमजोर बनाता है. सत्तर के दशक में भाषा को लेकर पाकिस्तान ने बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) पर भारी हिंसा की. नरसंहार के बीच बहुत से लोग पलायन कर गए. इसके बाद भारत की मदद से बांग्लादेश बन सका. वो हिंसा आज भी इन दोनों देशों के बीच गहरी खाई बनाए हुए है.

साल 1971 में आजाद बांग्लादेश में भी पाक से सहानुभूति रखने वालों को सजाएं मिलीं. वहां की सरकार ने वॉर क्राइम के लिए फांसी तक दे दी. आज भी वहां आम लोग पाकिस्तान से मेलजोल नहीं रखते. यहां तक कि पाकिस्तान से जुड़ी पार्टी इस्लाम-ए-जमाती भी उतना आगे नहीं आ सकी.

पाकिस्तान में भी ढाका को लेकर कभी उदारता नहीं दिखी. इस्लामाबाद ने आज तक ढाका से उस नरसंहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी. यहां तक कि उसे देश का दर्जा भी तीन साल बाद दिया. दशकों बाद भी बैर कम नहीं हुआ. कुछ साल पहले ढाका कैफे अटैक में पाकिस्तानी एजेंटों का इनवॉल्वमेंट सुनाई पड़ा था, जिसके बाद दोनों के डिप्लोमेटिक रिश्ते फिर दरके थे. ये अब तक चला आ रहा है. दोनों में रिश्ता तो है लेकिन बातचीत सीमित है.

सीडीएस जनरल अनिल चौहान फाइल फोटो
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने देश के पड़ोस में बन रहे त्रिकोणीय समीकरण पर बात की. (File Photo)

इधर चीन दोनों देशों में कॉमन है. वो खुद को पाकिस्तान का ऑल वेदर फ्रेंड बताता रहा. पाकिस्तान भी अपनी नीतियों में ऐसे बदलाव करता है, जो चीन के लिए सही रहें. पाक को खुश रखने में वो यहां तक चला गया कि भीतरखाने ही बगावत होने लगी. बलूचिस्तान के लोग नाराज हैं कि चीन की शह पर उनके यहां का नेचुरल रिसोर्स इस्तेमाल हो रहा है. बलूच लगातार चीनी अधिकारियों पर हमले कर रहे हैं ताकि पाकिस्तान घबराकर रुक जाए. हालांकि ऐसा हुआ नहीं. वैसे दोनों देशों का रिश्ता पूरी तरह ऑर्गेनिक नहीं, बल्कि भारत-विरोधी एजेंडा पर टिका हुआ है.

चीन पाकिस्तान को छूट इसलिए देता है क्योंकि वो उसे भारत के खिलाफ एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहता है. बता दें कि दक्षिण एशिया में भारतीय दबदबा बढ़ने के साथ ही इन दोनों का संबंध भी मजबूत दिखने लगा. ये स्वाभाविक तो है नहीं. चीन के कई और स्वार्थ भी हैं. जैसे, पाकिस्तान का बाजार या फिर ग्वादर पोर्ट के जरिए भू-रणनीतिक पहुंच का मिलना.

बराबरी के दिखते इस रिश्ते में लेकिन खासा असंतुलन है. चीन मजबूत है, जबकि पाक आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर भी कमजोर है. दोनों का संबंध साझा दुश्मन यानी भारत पर टिका हुआ है. चीन जब चाहे पीछे हट सकता है, जिसमें पाकिस्तान का भारी नुकसान है.

चीन-बांग्लादेश के रिश्ते के पकने की शुरुआत जाहिर है, देर से हुई. इसकी एक वजह पाकिस्तान ही था. चीन चूंकि पाक के करीब था, लिहाजा वो खुद को ताजा-ताजा आजाद हुए ढाका से नहीं जोड़ना चाहता था. हालांकि शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से दोनों का संबंध राजनीतिक रूप से अब ज्यादा मजबूत हो रहा है.

चीन ध्वज फोटो एपी
चीन खुद को पाकिस्तान का ऑल वेदर फ्रेंड बताता रहा. (Photo- AP)

भारत विरोधी एजेंडा इसमें असल गोंद है. लेकिन यहां भी असंतुलन है. चीन बेहद ताकतवर है. वो शर्तें तय करता है, बांग्लादेश उन्हें मानता है. चीन के साथ एक बात ये भी है कि वो कर्ज देकर देशों में घुसपैठ करता रहा. फिर चाहे वो श्रीलंका हो, या नेपाल या फिर पाक. ऐसे में लगातार अस्थिरता से जूझ रहा ढाका कंडीशन्स अप्लाई के साथ ही इसमें टिका रह सकेगा.

जैसा कि हम पहले कह चुके, इस तिकड़ी में सबसे कमजोर जोड़ पाकिस्तान और बांग्लादेश का है. दोनों पुरानी दुश्मनी के जख्म लिए हुए हैं. दोनों में कोई स्वाभाविक मेल नहीं. फिलहाल एंटी-इंडिया सेंटिमेंट जरूर उन्हें साथ रखे हुए है, लेकिन ये स्थाई होगा, ऐसा कोई संकेत फिलहाल नहीं दिख रहा.

इतिहास के बोझ के अलावा दोनों में कल्चरल फर्क भी है. ढाका ने अपनी पहचान धर्मनिरपेक्ष बंगाली राष्ट्र के रूप में गढ़ी, जबकि पाकिस्तान इस्लामी राष्ट्रवाद पर टिका रहा. दोनों में ऐतिहासिक कड़वाहट और सांस्कृतिक दूरी इतनी गहरी है कि वे चीन की कोशिश से साथ मिलें-बैठें भले ही, लेकिन सहज नहीं हो सकेंगे.

मतभेदों के बाद भी अगर तीनों मिल जाएं तो भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. जैसा कि जनरल चौहान आशंका जता चुके ये गठजोड़ देश की सुरक्षा के लिए खतरा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन से हालिया भारत-पाक संघर्ष में पाकिस्तान को लाइव इनपुट्स दिए. इसी जून में चीन में चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश की बैठक हुई. ये देश को अलग-थलग करने की रणनीति हो सकती है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *