भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में खेले जा रहे टेस्ट मैच का तीसरा दिन (12 जुलाई) नाटकीय तरीके से खत्म हुआ था. जब तीसरे दिन का खेल खत्म होने में जब 6 मिनट बचे थे, तो इंग्लैंड की दूसरी पारी शुरू हुई. इन 6 मिनटों में भारतीय टीम 2 ओवर्स फेंक सकती थी. लेकिन इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज जैक क्राउली ने समय बर्बाद करने की रणनीति बनाई, जिसके कारण सिर्फ एक ओवर ही हो पाया.

जैक क्रॉली ने जसप्रीत बुमराह के उस ओवर में शुरुआत से ही समय बर्बाद करना शुरू कर दिया. क्राउली ने साइट स्क्रीन के पीछे मूवमेंट की शिकायत की और दो बार स्ट्राइक लेने में देरी की. फिर पांचवीं गेंद को डिफेंस करते वक्त उन्हें चोट भी लग गई. भारतीय कप्तान शुभमन गिल इसके चलते इंग्लिश बल्लेबाज पर भड़क उठे. शुभमन ने क्राउली से बहस तो की ही, साथ ही गुस्से में कुछ अपशब्द भी बोले. इस दौरान बेन डकेट भी क्राउली का साथ देने पहुंच गए और माहौल काफी गर्म हो गया. जसप्रीत बुमराह, केएल राहुल और अन्य भारतीय खिलाड़ी भी इंग्लिश बैटर्स पर तंज कसते नजर आए.

अब इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज जोनाथन ट्रॉट ने इस पूरे मामले पर अपना रिएक्शन दिया है. उन्होंने शुभमन गिल की तुलना पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली से की, जो मैदान पर अपने एग्रेसिव एप्रोच के लिए जाने जाते हैं. ट्रॉट का मानना है कि शुभमन का व्यवहार खेल भावना के विपरीत था.

जोनाथन ट्रॉट ने जियोहॉटस्टार पर कहा, ‘गिल की तरफ से थोड़ी एक्टिंग दिखी. एक कप्तान के तौर पर आप ही माहौल बनाते हैं. उंगलियां दिखाना, थोड़ा टकराव की स्थिति में आना… ये सब एक पूर्व कप्तान (कोहली) की तरह लग रहा था. मुझे नहीं लगता कि यह खेल भावना में आता है. कभी-कभी आपको इससे ऊपर उठकर खेल दिखाना होता है.’

इस भारतीय दिग्गज ने अंग्रजों को घेरा

टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. फारुख इंजीनियर ने RevSportz से बातचीत में कहा, ‘इंग्लिश खिलाड़ी इसे पेशेवराना अंदाज कहेंगे, लेकिन मैं इसे चीटिंग कहूंगा. यह पूरी तरह से समय बर्बाद करने की रणनीति थी. वो बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उन्हें दूसरा ओवर खेलना पड़े. उन्होंने इसे स्पष्ट तौर पर दिखा भी दिया. अगर थोड़ी चालाकी से करते तो अलग बात थी, लेकिन इतने खुले तौर पर बेईमानी ठीक नहीं. हमारे बल्लेबाज कभी ऐसा नहीं करते.’

फारुख इंजीनियर ने इंग्लैंड की ‘बैजबॉल’ रणनीति पर भी निशान साधा. फारुख इंजीनियर कहते हैं, ‘ये बैजबॉल बस बंडलबाज है. बांग्लादेश, अफगानिस्तान या श्रीलंका जैसी टीमों के खिलाफ ये रणनीति कारगर साबित हो सकती है, लेकिन भारत के खिलाफ. अगर इंग्लैंड ने सच में ‘बैजबॉल’ अपनाया होता, तो भारत सीरीज जीत चुका होता.’

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