झारखंड के खूंटी ज़िले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां 15 साल की छात्रा सुनीता होरो (बदला हुआ नाम) हर हफ्ते दो-तीन बार नदी तैरकर स्कूल जाती है. दरअसल बनाई नदी पर बना एक पुल जो बीते 19 जून को भारी बारिश के बाद टूट गया. यह वही पुल है जो 2007 में एक करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था और रांची-खूंटी-सिमडेगा मार्ग को पेलेल गांव से जोड़ता था.

बोर्ड परीक्षा की वजह से स्कूल जाना जरूरी

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सुनीता खूंटी के सरकारी हाई स्कूल की छात्रा है और अगले साल बोर्ड परीक्षा देने वाली है. उसने बताया, ‘शुरुआत में गांववालों ने एक बांस की सीढ़ी लगाई थी जिससे टूटे हुए हिस्से को पार किया जा सके, लेकिन प्रशासन ने इसे खतरनाक बताकर हटा दिया. अब हमारे पास तैरने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है.’

सुनीता जैसे कई और छात्र-छात्राएं, खासकर अंगरबारी गांव से आने वाले, भी इस खतरे को झेल रहे हैं. तैरकर स्कूल जाते समय वो अपने बैग को सिर के ऊपर रखते हैं, लेकिन कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं, इसलिए घर से अतिरिक्त कपड़े लाने पड़ते हैं.

छात्राओं का कहना है कि नदी पार करके स्कूल जाना बेहद थकाऊ हो गया है और अक्सर अगले दिन वो स्कूल नहीं जा पाती हैं.पहले जो सफर पांच मिनट में पूरा हो जाता था, अब वही रास्ता 12 किलोमीटर के चक्कर से तय करना पड़ रहा है, जिसमें 40 मिनट लगते हैं और खर्च भी बढ़ गया है.

पुल टूटने का असर सिर्फ स्कूल के बच्चों पर नहीं बल्कि क्षेत्र के 12 गांवों के लोगों पर भी पड़ा है. खूंटी से रांची को जोड़ने वाला संपर्क पूरी तरह टूट गया है. रांची से ओडिशा की ओर जाने वाली बसें और भारी वाहन भी प्रभावित हुए हैं.

वैकल्पिक रास्ते के निर्माण में बारिश बाधा

खूंटी की सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) दीपेन्दु कुमारी ने बताया कि वैकल्पिक रास्ते के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है लेकिन लगातार बारिश के कारण काम में बाधा आ रही है. ट्रैफिक को अस्थाई रूप से दूसरी दिशा में डायवर्ट किया गया है.

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