कर्नाटक के शिवमोग्गा में 14 जुलाई को देश का दूसरा सबसे लंबा केबल-स्टे सिगंदूर ब्रिज का उद्धाटन किया गया. लेकिन इसका उद्घाटन राजनीतिक टकराव का मंच बन गया. इसके उद्घाटन ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच नए राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है.

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि इस उद्धाटन समारोह में न तो उन्हें बुलाया गया न तो राज्य सरकार के किसी मंत्री को औपचारिक रूप से बुलाया गया. उनका कहना है कि उनके बिना परामर्श के निमंत्रण पत्र बांटे गए, जिनपर उनका नाम लिखा था. जो कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन है.

CM सिद्धारमैया ने कहा कि ब्रिज उद्घाटन के मामले को लेकर मैंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से फ़ोन पर बातचीत की थी. उन्होंने कहा था कार्यक्रम टाल देंगे, लेकिन बाद में बीजेपी नेताओं के दबाव में बिना बताये उद्घाटन कर दिया गया.

सिद्धारमैया और कांग्रेस का विरोध

CM सिद्धारमैया ने बाद में साफा किया कि उन्हें ब्रिज के उद्धाटन समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण 11 जुलाई को मिला था. ब्रिज का उद्धाटन 14 जुलाई को होना था – यानि महज़ सिर्फ तीन दिन पहले. मैंने पहले से विजयपुरा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने का वादा कर चुका था.

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उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ औपचारिकता नहीं होती, यह संघीय ढांचे का सम्मान है. हम जब केंद्र से जुड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते हैं, तो उन्हें आमंत्रित करते हैं. हमने इस प्रोजेक्ट में 75 फीसदी तक योगदान किया है.

डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और जिला प्रभारी मंत्री मधु बंगारप्पा ने भी मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की.

केंद्र ने दिया जवाब

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि 11 जुलाई को मुख्यमंत्री को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था और 12 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ने का प्रस्ताव भी दिया गया था.

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