earthquakes in Jhajjar Rohtak near Delhi – दिल्ली से सटे झज्जर-रोहतक में एक हफ्ते से लगातार आ रहे हैं भूकंप, बड़ा खतरा तो नहीं? साइंटिस्ट क्या कह रहे – Are frequent earthquakes in Jhajjar Rohtak near Delhi a big threat What do scientists say


पिछले एक हफ्ते से दिल्ली के पास झज्जर और रोहतक (हरियाणा) में भूकंप के झटके महसूस हो रहे हैं. 10 जुलाई से अब तक कई बार धरती हिली है, जिससे लोगों में डर और चिंता बढ़ गई है. क्या यह छोटे-छोटे झटके किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं? वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं?

पिछले हफ्ते क्या हुआ?

  • 10 जुलाई: झज्जर में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद तक महसूस हुए.
  • 11 जुलाई: उसी इलाके में 3.7 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया, जो 10 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था.
  • 17 जुलाई: रोहतक में 3.3 तीव्रता का भूकंप रात 12:46 बजे आया, जो आठवें दिन का चौथा बड़ा झटका था.
  • कुल मिलाकर, पिछले सात दिनों में चार से अधिक भूकंप (2.5 तीव्रता से ऊपर) झज्जर-रोहतक क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं.

इन झटकों से कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर की. कईयों ने इसे “लंबा झटका” बताया, जो डर पैदा कर रहा है.

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earthquakes in Jhajjar Rohtak near Delhi

क्यों हो रहे हैं भूकंप?

IIT रुड़की के भूकंप विज्ञानी प्रो. कमल कहते हैं कि दिल्ली-एनसीआर और उसके आसपास के इलाके भूकंप के लिहाज से संवेदनशील हैं. इसके पीछे ये कारण हैं…

  • जियोलाइजिकल फॉल्ट लाइंस: झज्जर-रोहतक में महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट (MDF), दिल्ली-हरिद्वार रिज, और सोहना-मथुरा फॉल्ट जैसी सक्रिय दरारें हैं. ये दरारें धरती की प्लेटों के टकराव से बनी हैं.
  • हिमालय का प्रभाव: भारत की टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे ऊर्जा जमा होती है. जब यह ऊर्जा छूटती है, भूकंप आते हैं.
  • तनाव का जमा होना: वैज्ञानिकों का कहना है कि ये छोटे भूकंप टेक्टोनिक तनाव के संकेत हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

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बड़ा खतरा है क्या?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है…

  • तीव्रता का विश्लेषण: झज्जर-रोहतक में आए भूकंप 2.0 से 4.5 तीव्रता के हैं, जो आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाते. दिल्ली जोन-IV में आता है, जहां 5-6 तीव्रता के भूकंप सामान्य हैं, लेकिन 7-8 तीव्रता के भूकंप दुर्लभ हैं.
  • छोटे झटके का मतलब: कई वैज्ञानिकों का मानना है कि ये झटके “फोरशॉक” (बड़े भूकंप से पहले के झटके) हो सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर बार ऐसा हो. कई बार ये सिर्फ तनाव छोड़ने के संकेत होते हैं.
  • विशेषज्ञ की राय: भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के वैज्ञानिकों ने कहा कि 11 जुलाई के दो भूकंप एक ही फॉल्ट पर हुए, जो छोटे थे. अभी तक कोई बड़ा खतरा नहीं दिख रहा, लेकिन निगरानी जारी है.

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दिल्ली-एनसीआर का जोखिम

दिल्ली घनी आबादी वाला शहर है, जहां पुरानी और असुरक्षित इमारतें हैं. अगर कोई बड़ा भूकंप आया, तो नुकसान हो सकता है. इसलिए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने लोगों से जागरूकता और तैयारी की अपील की है. पिछले 25 सालों में दिल्ली-एनसीआर में हर साल औसतन 15-20 छोटे भूकंप आते हैं, लेकिन 5 तीव्रता से ऊपर के भूकंप दुर्लभ हैं.

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वैज्ञानिकों का संदेश

प्रो. कमल कहते हैं कि भूकंप की भविष्यवाणी संभव नहीं है, लेकिन इन छोटे झटकों से अलर्ट रहना जरूरी है. वे सलाह देते हैं कि सरकार और लोग मिलकर इमारतों को भूकंपरोधी बनाएं. NCS लगातार डेटा इकट्ठा कर रहा है. अगर कोई असामान्य गतिविधि दिखी, तो चेतावनी दी जाएगी.

डरें नहीं, तैयार रहें

झज्जर-रोहतक में एक हफ्ते से भूकंप आ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा खतरा नहीं है. ये छोटे झटके टेक्टोनिक तनाव के सामान्य संकेत हो सकते हैं.वैज्ञानिक निगरानी कर रहे हैं, लेकिन हमें भी सतर्क रहना होगा. अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहें और अफवाहों से बचें. धरती की ये हलचल हमें प्रकृति की शक्ति का एहसास दिलाती है- इसके साथ जीना सीखना हमारी जिम्मेदारी है.

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