उत्तर प्रदेश के सैफई में बने केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने मंदिर की वास्तु और गर्भगृह में मूल केदारनाथ की तरह शिवलिंग स्थापना पर कड़ा ऐतराज जताया है. महापंचायत ने इसे सनातन धर्म के श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करार दिया है.

महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल और महासचिव बृजेश सती ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उत्तराखंड स्थित चारधामों का धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, जिसकी नकल करना उचित नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चारधामों की वास्तु और नाम की नकल करके धार्मिक प्रतिष्ठान बनाना निंदनीय है.

सैफई में बने केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति को लेकर विवाद

महापंचायत ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अपील की है कि वो करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर की रचना केदारनाथ से अलग कराएं. साथ ही चेतावनी दी कि यदि संबंधित पक्षों ने संज्ञान नहीं लिया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा.

महापंचायत ने श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ बताया

महापंचायत ने बताया कि 18 जुलाई 2023 को उत्तराखंड कैबिनेट ने चारधामों के नाम के दुरुपयोग पर कार्रवाई का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन अब तक इसका पालन नहीं हुआ है. इससे पहले तेलंगाना में भी ऐसे ही मंदिर की नींव रखे जाने का विरोध किया गया था. महापंचायत ने कहा कि इस मामले में विधिक सलाह ली जा रही है और जल्द ही उत्तराखंड के चारधामों में विरोध प्रदर्शन भी शुरू किए जाएंगे.

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सैफई केदारनाथ मंदिर विवाद



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