सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है, जिसमें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे और उनके संबंधित राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है.

यह याचिका वकील घनश्याम उपाध्याय ने दायर की है, जिन्होंने पहले हिंदी भाषा के मुद्दे पर नागरिकों पर हो रहे हमले के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अधिकारियों को एक शिकायत भेजी थी. वकील का कहना है कि शिकायत के बावजूद ठाकरे के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, इसलिए “बेहद ज़रूरी” तरीके से यह जनहित याचिका दायर की गई है.

PIL में क्या कहा गया है?

याचिका में राज ठाकरेउनके चचेरे भाई और शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे द्वारा 5 जुलाई को आयोजित विजय रैली का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि राज ठाकरे ने मराठी न बोलने वालों को उनके कान के नीचे तक मारने को उचित ठहराया था.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज ठाकरे का प्रेम और स्नेह मराठी भाषा के लिए नहीं, बल्कि मुंबई नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर है और मुंबई शहर में आगामी नगर निगम चुनावों में फायदा लेने के मकसद से इन नखरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.

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दुश्मनी को बढ़ाना देने के आरोप

वकील घनश्याम उपाध्याय की याचिका में कहा गया है, “राज ठाकरे विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दे रहे हैं और ऐसा जानबूझकर या जानबूझकर कर रहे हैं, वे विध्वंसक गतिविधियों को भड़का रहे हैं और अलगाववादी गतिविधियों की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं. इस तरह देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डाल रहे हैं, जिसके लिए बीएनएस की धारा 152 के तहत आजीवन कारावास या सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है.”

पुलिस और चुनाव आयोग निर्देश देने की गुजारिश

याचिका में यह भी गुजारिश की गई है कि पुलिस को निर्देश देकर यह सुनिश्चित किया जाए कि राज ठाकरे और उनके राजनीतिक संगठन/राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस तरह की भीड़ हिंसा और लिंचिंग की घटनाएं न हों और पुलिस इनसे सख्ती से निपटे.”

इसमें भारत के चुनाव आयोग और देश के सभी राज्यों के चुनाव आयोगों को निर्देश देने की भी गुजारिश की गई है कि वे देश के राजनीतिक दलों की ऐसी अवैध गतिविधियों पर नजर रखने और कंट्रोल करने के लिए एक-दूसरे के साथ समन्वय में नीति तैयार करें, जो भारत की संप्रभुता, अखंडता और एकता को खतरे में डालती हैं या डालने की प्रवृत्ति रखती हैं. इसके साथ ही, ऐसे राजनीतिक दलों की मान्यता वापस ले लें, जो ऐसे अवैध और गैरकानूनी कृत्यों में लिप्त पाए जाते हैं.

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