बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र आज, सोमवार से शुरू हो रहा है, जो 25 जुलाई तक चलेगा. यह मौजूदा विधानसभा का आखिरी सत्र होगा, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनावी मौसम में लालू यादव के परिवार के भीतर भी हलचल मची है, जहां मनमुटाव के चलते दोनों भाई तेजस्वी और तेजप्रताप एक छत के भीतर तो नहीं रह रहे हैं, लेकिन फिर भी वे एक सत्र के भीतर जरूर नजर आने वाले हैं.
तेजप्रताप का अनुष्का के साथ फोटो वायरल होने की चर्चा ने बिहार सियासी तपिश बढ़ा दी थी. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी और परिवार दोनों से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया था. तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव के बीच मनमुटाव की खबरें पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में हैं.
मई में तेजप्रताप को न सिर्फ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से बाहर कर दिया गया था, बल्कि उन्हें पारिवारिक घर से भी निकाल दिया गया था. तेजप्रताप की गर्लफ्रेंड को लेकर विवाद की वजह से परिवार के भीतर तनाव बढ़ गया था. हालांकि, आज 11 बजे से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में तेजप्रताप और तेजस्वी अगल-बगल बैठे नजर आएंगे.
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तेजप्रताप से नाराज तेजस्वी
विवाद के बाद मीडिया के सामने तेजस्वी यादव बड़े भाई तेजप्रताप को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. तेजस्वी पर कई गंभीर – जैसे कि उनपर परिवार और पार्टी में अपना दबदबा कायम करने के लिए तेजप्रताप की बेदखली में शामिल होने जैसे आरोप लगे थे.
हालांकि, इन पारिवारिक विवाद के बावजूद दोनों भाई आज विधानसभा सत्र में साथ बैठेंगे. यह पहली बार है जब मई के बाद दोनों एक ही मंच पर सार्वजनिक रूप से साथ दिखेंगे. इससे पहले वे 3 मई को पटना के मिलर हाई स्कूल में आयोजित ‘अत्यंत पिछड़ा वर्ग जागरूकता सम्मेलन’ में दोनों भाई साथ नजर आए थे.
बिहार विधानसभा सचिवालय की सीटिंग अरेंजमेंट के मुताबिक, दोनों भाइयों के बैठने की जगहों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी पारिवारिक मनमुटाव और पार्टी से निष्कासन के बावजूद वे विधानसभा में साथ होंगे.
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दोनों भाई के रिश्ते फिर आएंगे पटरी पर?
चुनावी मौसम में तेजप्रताप की वायरल फोटो के बाद माना गया कि पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि तेजप्रताप पहले से ही शादीशुदा हैं और उनकी पहली पत्नी के साथ तलाक का मामला फंसा हुआ है. ऐसे में तेजप्रताप दूसरी लड़की के साथ नजर आए, जिससे लालू यादव ने माना कि न सिर्फ परिवार का नाम खराब हुआ, बल्कि चुनाव में पार्टी को भी नुकसान हो सकता है. यही वजह रही कि लालू ने सख्त कदम उठाते हुए तेजप्रताप को पार्टी से बेदखल करना बेहतर समझा.
अब जबकि चुनाव करीब है और विधानसभा सत्र में दोनों भाई साथ नजर आने वाले हैं, ऐसे में माना जा सकता है कि दोनों में बातचीत भी शुरू हो सकती है. चूंकि, तेजप्रताप यादव पार्टी से अलग चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं, और वह पिछले कुछ दिनों से विधानसभा सीटों का भी दौरा कर रहे हैं. मीडिया के सामने भी तेजप्रताप यादव का सख्त रुख नजर आ रहा है, ऐसे में उनकी पार्टी और घरवापसी का रास्ता भी इस सत्र से साफ हो सकता है. मसलन, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बड़े चुनावी मौसम में यह पांच दिवसीय विधानसभा सत्र दोनों भाई को करीब लाएगा?
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