Mahagun Mantra 2 के 900 परिवारों को सालों से रजिस्ट्री का इंतजार, हर वक्त रहता है घर खोने का डर – 900 Families of Mahagun Mantra 2 Await Registry for Years, Live in Constant Fear of Losing Homes


ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थिति महागुन मंत्रा 2 सोसायटी के करीब 900 लोगों को हमेशा इस बात का डर रहता है कि उनका घर उनसे छीन न जाए. घर मिलने के बाद भी यहां के लोग खौफ में जी रहे हैं. यह प्रोजेक्ट 2014 में लॉन्च हुआ था और बिल्डर ने 2017 में देने का वादा किया था, लेकिन बड़ी मुश्किल से 2022 में लोगों को घर का पजेशन तो मिल गया, लेकिन उनकी मुश्किलें खत्म नहीं. पजेशन के बाद अब लोग लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं अपने घरों की रजिस्ट्री के लिए. शनिवार और रविवार को छुट्टी के दिन अपने परिवार के साथ वक्त बिताने की जगह ये लोग बिल्डर और अथॉरिटी के ऑफिस में धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हैं.

महागुन मंत्रा के निवासी शशांक बताते हैं- ‘बिल्डर ने 2017 की जगह 2022 से अलग-अलग टावरों का पजेशन देना शुरू किया, वह भी आधी-अधूरी सुविधाओं के साथ. शुरुआती दिनों में बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और लिफ्ट तक की कमी थी. खासकर कोविड-19 के दौर में, जब लोग नौकरी और अन्य समस्याओं से जूझ रहे थे, बिल्डर ने उनकी परवाह नहीं की और 2022 में ही स्टांप ड्यूटी वसूल कर ली. लेकिन रजिस्ट्री अभी तक नहीं हुई. हमने पीएमओ ऑफिस, सीएम ऑफिस, डीएम, सांसद, विधायक सभी को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.” लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने कई बार रजिस्ट्री की तारीखें दीं, लेकिन कोई वादा पूरा नहीं हुआ.

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लोगों का कहना है कि बिल्डर पर अथॉरिटी का करीब 22 करोड़ रुपये बकाया था, जिसमें से मार्च 2024 तक केवल 6 करोड़ रुपये (कुल बकाया का 25%) का भुगतान हुआ. इसके बावजूद, अथॉरिटी का कहना है कि बिल्डर ने एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) प्राप्त नहीं किया, जिसके कारण रजिस्ट्री शुरू नहीं हो सकी. लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि उन्होंने स्टांप ड्यूटी के रूप में लगभग 18 करोड़ रुपये अथॉरिटी को दे दिए, लेकिन इस राशि पर कोई ब्याज या लाभ नहीं मिल रहा. 18 करोड़ रुपये का ब्याज कहां जा रहा है? क्या यह हमारी सोसायटी के कल्याण में लगेगा? अगर नहीं, तो हम यह पैसा क्यों दे रहे हैं?

लोगों को फ्लैट की रीसेल में भी हो रही है दिक्कत

महागुन मंत्रा 2 के निवासियों को रजिस्ट्री की देरी के साथ-साथ फ्लैट की रीसेल में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. निवासियों का कहना है कि उनकी संपत्ति की वैल्यू कम हो रही है और रीसेल की प्रक्रिया में बिल्डर द्वारा वसूले जाने वाले ट्रांसफर चार्जेज एक बड़ा खेल बन गए हैं. महागुन के एक निवासी शेखर कहते हैं- ‘हम लोग मिडिल क्लास लोग हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई. 2014 में फ्लैट बुक किया, जो 2018 में मिलना था, लेकिन 10 साल बाद 2024 में भी रजिस्ट्री नहीं हुई. इसके पीछे एक बहुत बड़ा सिस्टम है, क्योंकि बिल्डर 4% रिसेल में क्लेम करता है. तो एक प्रॉपर्टी अगर ₹80 लाख की बिक रही है तो उसपर 4% बिल्डर की जेब में जाता है ट्रांसफर चार्ज.’

महागुन मंत्रा 2 के निवासियों का कब खत्म होगा इंतजार

अधूरी सुविधाएं और डर का माहौल

सोसायटी में रहने वाले एक परिवार ने बताया कि पजेशन के बाद भी बुनियादी सुविधाएं जैसे लिफ्ट, सुरक्षा और रखरखाव ठीक नहीं हैं. एक और निवासी अल्पना कहती हैं- “हमारे बच्चे पूरी सुविधाओं के बिना रह रहे हैं. दो साल हो गए पजेशन को, लेकिन यहां की हालत खस्ता है.’ सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए निवासी डर जताते हैं कि बिना रजिस्ट्री के उनके फ्लैट पर मालिकाना हक नहीं है. 65 साल की निवेदिता बसु कहती हैं- “मेरे पति रिटायर्ड हैं. हमने 2018 में फ्लैट बुक किया था, उम्मीद थी कि रिटायरमेंट से पहले 2022 तक पजेशन मिल जाएगा. लेकिन ढाई साल तक किराए के मकान में रहना पड़ा. अब पजेशन तो मिला, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई हैं, हम लोगों को हमेशा डर लगा रहता है कि कोई धोखाधड़ी न हो जाए. “

बिल्डर की जवाबदेही पर सवाल

निवासियों का कहना है कि बिल्डर ने सारा पैसा वसूल कर लिया, और अथॉरिटी ने भी स्टांप ड्यूटी ले ली, फिर भी रजिस्ट्री नहीं हो रही. उन्हें डर है कि बिल्डर भागने की तैयारी में है, क्योंकि वह नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर रहा और मौजूदा प्रोजेक्ट्स को अन्य बिल्डरों को सौंप रहा है. निवासियों ने डीएम, यूपी सरकार और अथॉरिटी को 59 मेल भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. दो साल बाद डीएम ने एक बार मुलाकात के लिए बुलाया, लेकिन उसके बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई.

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क्या है निवासियों की मांग?

महागुन मंत्रा के निवासी चाहते हैं कि सरकार और अथॉरिटी बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. वे पूछते हैं कि जब उन्होंने सारी औपचारिकताएं पूरी कर दीं, तो रजिस्ट्री में देरी क्यों हो रही है? उनका कहना है कि यह एक तरह का “गबन” है, जहां उनकी मेहनत की कमाई दांव पर लगी है. हर हफ्ते शनिवार और रविवार को वे बिल्डर के दफ्तर और साइट पर धरना देते हैं, गर्मी, सर्दी, बारिश में सड़कों पर बैठते हैं, लेकिन बिल्डर की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

महागुन मंत्रा 2 के निवासियों ने लंबी लड़ाई के बाद पजेशन तो हासिल कर लिया, लेकिन अब रजिस्ट्री की लड़ाई उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है. वे उम्मीद करते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें अपने घरों का मालिकाना हक मिलेगा. यह मध्यम वर्ग के उन सपनों की कहानी है, जो एक घर के लिए 10 साल तक संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी भी अधूरे हैं.

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