पाकिस्तान (Pakistan) की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना प्रमुख असीम मुनीर पर निशाना साधते हुए कहा है कि जनरल सेना का अपमान कर रहे हैं और सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय हितों की बलि दे रहे हैं. इमरान खान की सोशल मीडिया प्रोफाइल से किए गए पोस्ट में कहा गया, “देश मुनीर के कानून के तहत चल रहा है और आईएसआई उसे संरक्षण दे रही है. वह सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर राष्ट्रीय हित की बलि देने को तैयार हैं. यह सेना प्रमुख सेना का अपमान वैसे ही कर रहे हैं, जैसे याह्या खान ने कभी किया था.”

वह पूर्व सेना प्रमुख जनरल याह्या खान का जिक्र कर रहे थे, जिनके शासन में पूर्वी पाकिस्तान में गृहयुद्ध हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप एक आजाद देश बांग्लादेश का उदय हुआ.

‘इस्लामाबाद हाई कोर्ट का जज सात महीने से…’

कई मामलों में दो साल से जेल में बंद इमरान खान ने कहा, “इस वक्त, सीनेट, नेशनल असेंबली, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति, सभी असंवैधानिक हैं. एक दिखावटी संवैधानिक अदालत बनाई गई, जिससे संसद में हमारी सीटें कम हो गईं.”

एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ की सीटें दूसरों को सौंप दी गईं. इमरान खान ने आरोप लगाया कि संवैधानिक अदालतें, जो न्याय करने के लिए बनी हैं, अब मुनीर के गुर्गों से भरी पड़ी हैं.

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा पर ऐतिहासिक चुनावी धोखाधड़ी करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “इस्लामाबाद हाई कोर्ट का एक जज सात महीने से मेरी अपीलों पर सुनवाई नहीं कर रहा है क्योंकि उसे भी मुनीर से निर्देश मिलते हैं. इस वक्त, हमारे देश में मुनीर का कानून चलता है, मानो पाकिस्तान उसका ही हो.”

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‘लोकतंत्र ध्वस्त कर दिया गया…’

इमरान ने कहा कि न्यायपालिका, राज्य संस्थाओं और लोकतंत्र को व्यवस्थित रूप से ध्वस्त कर दिया गया है. सैन्य अदालतों को वैध घोषित कर दिया गया है, जो वास्तव में न्यायपालिका द्वारा खुद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव है. मेरी पत्नी बुशरा बीबी को मुझे तोड़ने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन मैं यह बिल्कुल साफ कर दूं, मैं मुनीर की राजशाही को स्वीकार करने के बजाय मरना पसंद करूंगा.

उन्होंने कहा कि एक देश तब बर्बाद हो जाता है, जब असमर्थ लोगों को बलपूर्वक संस्थाओं पर थोपा जाता है.

अपने साथ हुई यातनाओं के बारे में बात करते हुए, इमरान खान ने कहा कि उन्हें दिन में 22 घंटे एकांत कारावास में रखा जाता था और किताबें, अखबार और टेलीविजन देखने की अनुमति नहीं थी.

इमरान खान ने कहा, “मैंने अपने बेटों से कहा है कि वे इस मामले को मौलिक मानवाधिकारों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में ले जाए.”

उन्होंने आगे कहा कि मैं अमेरिका में किसी से मदद नहीं मांग रहा हूं. मैं केवल अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठा रहा हूं. जब राष्ट्रपति ट्रंप पहली बार सत्ता में आए थे, तब भी मैंने कहा था कि पाकिस्तान के बारे में फैसले पाकिस्तान में ही लिए जाने चाहिए. हमने हर दरवाज़ा खटखटाया है, लेकिन किसी ने नहीं सुना.”

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