International Friendship Day 2025: 21वीं सदी की दोस्ती अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रही. नई पीढ़ी अब AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT, Siri और Replica को अपना इमोशनल सपोर्ट और सलाहकार मानने लगी है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 70% से अधिक किशोरों ने AI को कम से कम एक बार इस्तेमाल किया है.
अंतर्राष्ट्रीय दोस्ती दिवस 2025: 21वीं सदी की शुरुआत में जहां दोस्ती का मतलब चाय की दुकान पर घंटों गपशप, पार्क में टहलना या स्कूल-कॉलेज की कॉमन यादें हुआ करती थीं, वहीं आज दोस्ती की परिभाषा तेजी से बदल रही है. अब इंसान न सिर्फ इंसानों से, बल्कि AI असिस्टेंट्स से भी बात कर रहा है और अपने दिल की बातें कर रहा है. वे अकेलेपन को कम करने का जरिया भी इन्हें बना चुका है.
भावनाओं को समझने वाला होता है एआई
विभिन्न रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एआई आज सिर्फ जानकारी देने वाला नहीं, बल्कि भावनाओं को समझने और जवाब देने की क्षमता रखता है. चैट जीपीटी जैसे मॉडलों के साथ यूजर्स अब रिलेशनशिप, मानसिक तनाव, करियर से जुड़े सवाल यहां तक कि अकेलेपन की बात भी शेयर करते हैं. उन्हें तुरंत, बिना किसी पूर्वाग्रह के जवाब मिलता है.
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70 फीसदी से ज्यादा किशोरों ने एआई अस्टिटेंट का किया इस्तेमाल
नो टेकी की रिपोर्ट में बताया गया है कि 70 फीसदी से ज्यादा किशोरों ने कम से कम एक बार एआई अस्टिटेंट जैसे रिपलिका या जैसे तमाम एआई का उपयोग किया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 52 फीसदी लोग इसका नियमित रूप से इसका उपयोग करते हैं. वहीं, 31 फीसदी किशोरों के अनुसार एआई चैट बराबर या उससे बेहतर महसूस होता है. जितना असली दोस्त से संवाद करना.
एआई है एक अच्छा श्रोता और समझदार सलाहकार
इससे यह स्पष्ट होता है कि एआई आज सिर्फ जानकारी देने वाला नहीं, बल्कि भावनाओं को समझने और जवाब देने की क्षमता रखता है. चैटजीपीटी जैसे मॉडलों के साथ यूजर्स अब रिलेशनशिप, मानसिक तनाव, करियर से जुड़े सवाल, यहां तक कि अकेलेपन की बात भी शेयर करते हैं. उन्हें तुरंत, बिना किसी पूर्वाग्रह के जवाब मिलता है.
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