अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. यह Tariff 1 अगस्‍त से भारत पर लागू होगा. साथ ही भारत के रूस से तेल और डिफेंस की खरीदारी करने पर भी अलग से जुर्माना लगाने की भी घोषणा की है. अमेरिका की ओर से टैरिफ का ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार को लेकर चर्चा चल रही है.

कुछ ही दिन बाद अमेरिका की टीम भारत व्‍यापार पर चर्चा (India US Trade Deal) के लिए आने वाली थी, लेकिन अब इस नए ऐलान से दोनों देशों के बीच व्‍यापार डील में रुकावट दिख रही है. साथ ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का भी खतरा मड़रा रहा है. वहीं इसका असर दुनिया भर के अन्‍य बाजार पर भी देखने को मिल सकता है.

क्‍या व्‍यापार समझौता खत्‍म?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्‍सपोर्टर मार्केट (India-US Export) रहा है, जिसका द्विपक्षीय व्‍यापार 2024 में करीब 128 अबर डॉलर तक था. हालांकि अब इस नए ऐलान से दोनों देशों के बीच चल रही महीनों की व्‍यापार चर्चा खत्‍म मानी जा रही है. अब दोनों देशों के बीच व्‍यापार समझौता होना भी कठिन लग रहा है, क्‍योंकि इस घोषणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा महीनों से चल रहे प्रयासों को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है.

भारत पर अमेरिका ने क्‍यों लगाया टैरिफ?
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने भारत पर ‘दुनिया में सबसे ज्‍यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक’ का आरोप लगाया है. साथ ही ‘कठोर’ नॉन-टैरिफ बैरियर लगाने का भी आरोप लगाया है. ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ और जुर्माना इसलिए भी लगाया है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में डिफेंस और तेल खरीदता है.

ट्रंप का कहना है कि यह रूस यूक्रेन युद्ध के बीच विवादास्पद है. भारत के अलावा ट्रंप ने कुछ अन्‍य देशों जैसे कनाडा और मेक्सिको समेत दर्जनों देशों पर टैरिफ बढ़ाया है. कुछ मामलों में यह टैरिफ 50 फीसदी भी हो सकता है.

ट्रंप युद्धविराम समझौता कराने की कर रहे कोशिश
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ट्रंप रूस पर यूक्रेन में 10 दिनों के युद्धविराम समझौते (Russia-Ukrain War) को स्वीकार करने का दबाव बना रहे हैं. ट्रंप भारत पर यह जुर्माना लगाकर रूस की अर्थव्यवस्था में मदद करने वाले देशों को एक संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं या वे सोच रहे हैं कि यह एक उदाहरण हो सकता है.

बता दें अमेरिका से बढ़ते संबंधों के बावजूद भारत रूस से काफी तेल और डिफेंस खरीदता है. नए टैरिफ भारत को अपनी व्‍यापार और विदेश नीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर सकते हैं.

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