आजकल रूस और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है, खासकर यूक्रेन युद्ध और पनडुब्बी तैनाती के बाद. दोनों देशों के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियारों का जखीरा है, जो किसी भी वक्त तबाही मचा सकता है. आइए, समझते हैं कि इनके हथियार क्या हैं? उनकी ताकत क्या है? अगर परमाणु युद्ध हुआ तो कौन जीतेगा?
रूस और अमेरिका के पास कितने हथियार हैं?
दोनों देशों के पास दुनिया के ज्यादातर परमाणु हथियार हैं. हाल के अनुमानों के मुताबिक…
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- रूस: लगभग 5,580 परमाणु हथियार. इनमें से 1710 तैनात हैं, जैसे मिसाइलों, पनडुब्बियों और बमवर्षकों में. बाकी रिजर्व या रिटायर्ड हैं.
- अमेरिका: लगभग 5,428 परमाणु हथियार. इनमें से 1644 तैनात हैं, जो मिसाइलों और बमों में इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.
दोनों देशों के पास हथियारों की संख्या लगभग बराबर है, लेकिन इस्तेमाल के लिए तैयार हथियारों में मामूली अंतर है. रूस के पास थोड़ा ज्यादा जखीरा है, लेकिन अमेरिका ने अपने हथियारों को मॉडर्न करने पर ज्यादा ध्यान दिया है.
मिसाइलों की ताकत: कौन आगे?
मिसाइलें किसी भी परमाणु युद्ध की रीढ़ होती हैं. आइए, देखते हैं दोनों के पास क्या है…
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रूस की मिसाइलें

- RS-28 SARMAT (SATAN-2): यह हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 18000 किलोमीटर तक मार कर सकती है. इसकी स्पीड 24,500 किमी/घंटा है. यह एक साथ कई जगह हमला कर सकती है.
- RS-24 यार: यह 12000 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल है, जो 200 किलोटन विस्फोट पैदा कर सकती है. रूस के पास 63 मोबाइल और 10 साइलो लॉन्चर हैं.
- रूस की मिसाइलें तेज और सटीक हैं, लेकिन इनकी तकनीक थोड़ी पुरानी पड़ रही है.
अमेरिका की मिसाइलें

- Minuteman III: यह 10,000 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल है, जो 28,200 किमी/घंटा की स्पीड से चलती है. इसमें 475 किलोटन का वॉरहेड लगाया जा सकता है.
- सेंटिनल ICBM: नई पीढ़ी की मिसाइल, जो अंतरिक्ष में सैटेलाइट तक नष्ट कर सकती है. इसका परीक्षण हाल ही में सफल रहा है.
- अमेरिका की मिसाइलें मॉडर्न हैं और बेहतर तकनीक से लैस, जो उन्हें रूस से थोड़ा आगे रखती हैं.
दोनों देशों की मिसाइलें एक-दूसरे के देशों तक आसानी से पहुंच सकती हैं, लेकिन अमेरिका की नई मिसाइलें और सटीकता रूस से बेहतर मानी जाती हैं.
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बम: कौन सा सबसे खतरनाक?
परमाणु बमों की ताकत को मेगाटन (मिलियन टन TNT) में मापा जाता है. देखते हैं दोनों के पास क्या है…

- रूस का Tsar Bomba: यह 50 मेगाटन का बम है, जो हिरोशिमा बम (15 किलोटन) से 3,300 गुना ताकतवर है. यह अब रिटायर्ड है, लेकिन इसका डर अभी भी है.
- अमेरिका का B-41: 25 मेगाटन का हाइड्रोजन बम, जो 1960 के दशक में बना था. अब इसे छोटा करके मिसाइलों में इस्तेमाल किया जाता है.
- रूस का Tsar Bomba तकनीकी तौर पर सबसे ताकतवर है, लेकिन अमेरिका के पास छोटे लेकिन सटीक बमों की संख्या ज्यादा है.
परमाणु युद्ध में कौन जीतेगा?
अब सवाल यह है कि अगर ये दोनों देश परमाणु युद्ध लड़ें, तो कौन जीतेगा? इसका जवाब आसान नहीं है, क्योंकि…
तबाही दोनों तरफ होगी: दोनों देशों के पास इतने हथियार हैं कि एक-दूसरे को पूरी तरह नष्ट कर सकते हैं. अगर सारे हथियार इस्तेमाल हुए, तो लाखों लोग मरेंगे. धरती का माहौल सालों तक खराब रहेगा (न्यूक्लियर विन्टर).
रूस का फायदा: रूस के पास थोड़ा ज्यादा हथियारों का जखीरा है. उसकी मिसाइलें तेजी से हमला कर सकती हैं. अगर वह पहले हमला करे, तो शुरुआत में बढ़त ले सकता है.
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अमेरिका का फायदा: अमेरिका की तकनीक, सैटेलाइट और डिफेंस सिस्टम (जैसे एयर डिफेंस) रूस से बेहतर हैं. उसकी नई मिसाइलें और पनडुब्बियां रूस के लिए खतरा बन सकती हैं. साथ ही, नाटो देशों का समर्थन भी अमेरिका को मजबूत करता है.
ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु युद्ध में कोई जीत नहीं होगी. दोनों देशों को इतना नुकसान होगा कि जीतने वाला भी हार मान लेगा.
और क्या-क्या मायने रखता है?
- पनडुब्बियां: दोनों के पास न्यूक्लियर पनडुब्बियां हैं, जो गुप्त रूप से हमला कर सकती हैं. अमेरिका की ओहायो क्लास और रूस की यूरी डोलगोरुकी पनडुब्बियां खतरनाक हैं.
- रणनीति: पहले हमला करने वाला थोड़ा फायदा ले सकता है, लेकिन दूसरा जवाबी हमला सब खत्म कर देगा.
- लोगों का नुकसान: अनुमान है कि पहले ही दिन 10-20 करोड़ लोग मर सकते हैं. बाकी बीमारी और भुखमरी से प्रभावित होंगे.
भारत के लिए क्या मायने?
भारत रूस से तेल और हथियार खरीदता है. अमेरिका से तकनीक. अगर ये युद्ध हुआ, तो भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर असर पड़ेगा. हमें निष्पक्ष रहकर शांति की कोशिश करनी होगी.
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