Prabhat Khabar Online Legal Counseling: धनबाद-प्रभात खबर की ओर से रविवार को आयोजित लीगल काउंसेलिंग में धनबाद के वरीय अधिवक्ता भागीरथ राय ने धनबाद, गिरिडीह, बोकारो के पाठकों के सवालों पर सलाह दी. प्रॉपर्टी विवाद, रिटायरमेंट के बाद पावना और पुलिस के केस नहीं लेने से संबंधित कई सवाल पूछे गये. वरीय अधिवक्ता ने सभी सवालों पर अपनी सलाह दी. उन्होंने कहा कि थाना केस नहीं लेता, वरीय अधिकारी को भी लिखित दें. ऑनलाइन भी शिकायत करें. वरीय अधिकारी कुछ नहीं करते हैं, तो सीधे कोर्ट की शरण में जाएं. आम आदमी के लिए सरल और सुगम रास्ता है न्यायालय.

एक केस में दो जजमेंट पर क्या करें?

हीरापुर से एसके सिंह का सवाल : एक केस में कोर्ट का दो जजमेंट आया है. इसमें क्या करें?
अधिवक्ता की सलाह : जोनल कोर्ट से आग्रह करें, जो उचित होगा, उसी पर कोर्ट ऑर्डर पास करेगा.
जमुआ, गिरिडीह से नंदलाल यादव का सवाल : मारपीट का केस है. जमानत ले लिए हैं. सुपरविजन में केस से नाम हटाना चाहते हैं.
अधिवक्ता की सलाह : पुलिस के सुपरविजन में साक्ष्य नहीं मिला तो एफआरटी हो जायेगा. स्वत: आपका नाम हट जायेगा.
बनियाडीह गिरिडीह से नारायण साहु का सवाल : रिटायर्ड हो गये हैं. हाईकोर्ट के आदेश पर पावना मिला, लेकिन जितना मिलना चाहिए उतना नहीं मिला और न ही ब्याज दिया गया. क्या करें.
अधिवक्ता का सलाह : आप अपने हिसाब से गणना करें. विभाग को लिखित शिकायत दें. अगर विभाग राशि नहीं देता हो, तो हाईकोर्ट में पुन: रिट फाइल करें.

जमीन का मुआवजा नहीं मिला तो क्या करें?

निरसा से एके मुखर्जी का सवाल : एमपीएल ने जमीन अधिग्रहण किया है. बाकी रैयत को जमीन का भुगतान हो गया है. मेरी जमीन का अब तक भुगतान नहीं हुआ.
अधिवक्ता का सलाह : हाइकोर्ट में रिट फाइल करें.
भूली से कादिक नापित का सावल : जमीन खरीदना चाहते हैं. कैसे मालूम होगा कि जमीन का मालिक कौन है.
अधिवक्ता का सलाह : जमीन का मौजा नंबर, खाता नंबर व प्लॉट मालूम करें. डीसी ऑफिस से खतियान निकलवाइए. इसमें पता चल जायेगा कि जमीन का मालिक कौन है. सीओ ऑफिस से यह पता चल जायेगा कि किसके नाम से अभी रसीद कट रही है.
चीरागोड़ा धनबाद से विजय जायसवाल का सवाल : घर के पास एक ग्रिल बनाने की एक दुकान है. खटर-पटर आवाज से हमलोग परेशान हैं. एसडीओ से शिकायत की गयी. एसडीओ ने ग्रिल दुकानदार के पक्ष में फैसला सुना दिया. क्या करें.
अधिवक्ता का सलाह : डीसी को लिखित आवेदन करें या हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करें.

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