विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “हम जटिल और अनिश्चित समय में जिंदगी गुजार रहे हैं और हमारी सामूहिक इच्छा एक निष्पक्ष और प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक व्यवस्था देखने की है, न कि कुछ लोगों के दबदबे वाली व्यवस्था.” एस जयशंकर ने इशारों-इशारों में ये कह दिय कि दुनिया में कुछ देशों की दादागीरी नहीं चलेगी. उन्होंने BIMSTEC पारंपरिक संगीत महोत्सव ‘सप्तसुर’ के उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन में कहा कि इस कोशिश को अक्सर ‘पॉलिटिकल या इकोनॉमिक रीबैलेंसिंग’ के रूप में प्रजेंट किया जाता है.

बंगाल की खाड़ी मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल और इकोनॉमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 1997 में बैंकॉक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी.

शुरुआत में BIST-EC  (बांग्लादेश-भारत-श्रीलंका-थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के नाम से जाना जाने वाला यह संगठन अब BIMSTEC के नाम से जाना जाता है और इसमें सात सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें म्यांमार को बाद में 1997 में और भूटान तथा नेपाल को 2004 में इसमें शामिल किया गया.

‘परंपराओं का विशेष महत्व…’

एस जयशंकर ने क्षेत्रीय समूह के विभिन्न सदस्य देशों से आए महोत्सव के प्रतिभागियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह संगीत समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा BIMSTEC समिट में किए गए कमिटमेंट को फॉलो करता है.

एस जयशंकर ने कहा, “हम जटिल और अनिश्चित समय में जी रहे हैं, और हमारी सामूहिक इच्छा एक निष्पक्ष और प्रतिनिधि वैश्विक व्यवस्था देखने की है, न कि कुछ लोगों के प्रभुत्व वाली व्यवस्था. इस कोशिश को अक्सर ‘पॉलिटिकल या इकोनॉमिक रीबैलेंसिंग’ के रूप में प्रजेंट किया जाता है.”

अपने संबोधन में, विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि समाज के लिए सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करना सांस्कृतिक कौशल, “विशेष रूप से सांस्कृतिक कौशल” के जरिए से भी प्राप्त किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, “इस सिलसिले में, परंपराओं का विशेष महत्व है, क्योंकि आखिरकार वे पहचान को परिभाषित करती हैं. अगर हम भविष्य को आकार देने के बारे में आश्वस्त होना चाहते हैं, तो हमें अपनी पहचान के प्रति आश्वस्त होना होगा. हमारे जैसे देशों के लिए, परंपराएं वास्तव में शक्ति का एक बड़ा स्रोत हैं.”

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‘संगीत दूसरों के साथ जुड़ने का जरिया…’

विदेश मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संगीत ‘हम सभी के लिए संस्कृति, विरासत और परंपरा’ है, और व्यक्तिगत रूप से या समूह के रूप में, यह रचनात्मकता या कभी-कभी भावनाओं की अभिव्यक्ति भी है.

एस जयशंकर ने आगे कहा, “संगीत हमेशा से ही आपस में और दूसरों के साथ जुड़ने का एक जरिया रहा है. बिम्सटेक सदस्य देशों के संगीत की साझा परंपराएं और तमाम तरह की बारीकियां, दोनों ही पूरी तरह से प्रदर्शित होंगी.”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संगीत इतना कुछ लेकर चलता है कि इसे समाज की आत्मा माना जाना स्वाभाविक है, लेकिन जब बात पारंपरिक संगीत की आती है, तो यह और भी ज़्यादा अहम हो जाता है.

एस जयशंकर ने कहा, “संस्कृति के अन्य रूपों की तरह, संगीत भी देशों के बीच एक सेतु का काम करता है.”

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