गाजियाबाद के थाना ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में पुलिस ने एक सनसनीखेज मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो नवजात शिशुओं की तस्करी ‘प्लॉट’ जैसे कोडवर्ड्स का इस्तेमाल कर करता था. इस मामले में पुलिस ने गिरोह से जुड़े 2 पुरुष और 2 महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, अपहृत एक नवजात को पुलिस ने महज चार घंटे के भीतर बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया.

कोडवर्ड ‘प्लॉट’ से होती थी पहचान

एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. गिरोह के सदस्य नवजातों को कोडवर्ड ‘प्लॉट’ से पहचानते थे. जब किसी बच्चे की तस्वीर भेजनी होती, तो यह कहा जाता, ‘नया प्लॉट आया है’ इसके बाद बच्चे की त्वचा का रंग, लिंग और उम्र के आधार पर डील तय होती. गोरे रंग के बच्चों की कीमत डेढ़ से ढाई लाख रुपये तक जाती थी, जबकि सांवले बच्चों को कम कीमत पर बेचा जाता.

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मुरादाबाद से अमरोहा तक फैला था नेटवर्क

गिरोह की महिला सदस्य संध्या ने पूछताछ में बताया कि मुरादाबाद की एक नर्स ने गोरे बच्चे के लिए ढाई लाख रुपये की पेशकश की थी. हालांकि समय पर ‘पार्टी’ न पहुंचने के कारण बच्चा अमरोहा की दूसरी महिला को डेढ़ लाख में बेच दिया गया. यह नेटवर्क मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, दिल्ली, रूड़की जैसे शहरों तक फैला हुआ था. नर्स, डॉक्टर, चैरिटी संस्थाओं में काम करने वाले लोग और मैरिज ब्यूरो चलाने वाली महिलाएं तक इस गोरखधंधे में शामिल हैं.

चार आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस ने वादी राशिद की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुकदमा अपराध संख्या 371/25, धारा 143(4) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया. इसके बाद जांच में जुटी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट और नेटवर्किंग के जरिए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों में नावेद पुत्र इस्लामुद्दीन (प्रेमनगर, लोनी), अफसर अली उर्फ अल्फाज पुत्र मेहदी हसन (पूजा कॉलोनी, ट्रोनिका सिटी), स्वाती उर्फ साइस्ता पत्नी वसीम (डंगडूगरा, शामली) और संध्या पत्नी सौरव चौहान (अंकित विहार,मुजफ्फरनगर)शामिल हैं.

बरामद बच्चा अपने माता-पिता और पुलिस के साथ.
बरामद बच्चा अपने माता-पिता और पुलिस के साथ.

डराने वाले खुलासे

गिरोह के सदस्यों ने कबूला कि वे कई बार गरीब परिवारों से बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाते थे. कुछ मामलों में मां को यह झूठ बोल दिया जाता था कि बच्चा मर गया है, जबकि उसे बेच दिया जाता था. यह व्यापार सुंदर और गोरे बच्चों की मांग पर आधारित था, जो समाज में मौजूद रंगभेद मानसिकता को उजागर करता है.

पुलिस का अगला कदम

ट्रोनिका सिटी पुलिस आगे इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है. जल्द ही दिल्ली और पश्चिमी यूपी में फैले इस रैकेट से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं. पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य डॉक्टरों, नर्सों और दलालों को भी चिन्हित कर रही है. इस मामले में बाल संरक्षण आयोग और अन्य एजेंसियों की मदद भी ली जा रही है.

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