सैन्य अधिकारी मानेकशॉ, ब्रिगेडियर उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा के योगदान से रूबरू होंगे स्कूली छात्र


Education: हाल ही में कक्षा 8 की नयी इतिहास की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियांड’ में मुगल शासकों के शासन को लेकर कई तरह की सामग्री एनसीईआरटी की किताब में जोड़ी गयी. इसे लेकर काफी विवाद हुआ और विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रही है. इसमें मुगल शासक बाबर को निर्दयी, अकबर के शासन को क्रूर और सहिष्णुता का मिश्रण करार देते हुए औरंगजेब को सैन्य शासक के तौर पर बताया गया.

एनसीईआरटी के नये पाठ्यक्रम के तहत पहली बार छात्रों को दिल्ली सल्तनत, मुगलों, मराठों और औपनिवेशिक युग की जानकारी देने का काम किया गया. पहले यह विषय कक्षा 7 में पढ़ाए जाते थे, लेकिन इसे कक्षा 8 के छात्रों को पढ़ाया जाएगा. इस बीच सरकार ने फैसला लिया है कि अब एनसीईआरटी की किताब में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा के जीवन और बलिदान को पढ़ाया जायेगा.

मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कक्षा 8 के उर्दू, कक्षा सात के उर्दू और कक्षा 8 के अंग्रेजी विषय में इसे शामिल किया गया है. इस बीच एनसीईआरटी की ओर किताब के बारे में फीडबैक हासिल करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है.

छात्रों में कर्तव्य और साहस की भावना पैदा करना है मकसद

एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में सेना के जुड़े अधिकारियों के योगदान को शामिल करने का मकसद छात्रों में कर्तव्य और साहस को लेकर भावना पैदा करना है. सैम मानेकशॉ देश के पहले सैन्य अधिकारी रहे, जिन्हे फील्ड मार्शल का पद दिया गया. वे सामरिक मामले के जानकार के साथ कुशल सैन्य नेतृत्वकर्ता थे. वहीं ब्रिगेडियर उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन कुर्बान करने में पीछे नहीं रहे.

राष्ट्र सेवा के लिए दोनों अधिकारियों को महावीर और परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. नेशनल वॉर मेमोरियल के गठन के प्रयास के तहत रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच समझौता किया गया कि देश सेवा के लिए बलिदान देने वाले सैन्य कर्मियों के योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए. समझौते के तहत एनसीईआरटी ने सैन्य अधिकारियों के योगदान को पाठ्यक्रम में जगह देने का फैसला लिया है.

सैन्य अधिकारियों के कहानी को समझकर युवाओं में देश की सेना का इतिहास, देश निर्माण में उनके योगदान के बारे में जानने का मौका मिलेगा. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को नेशनल वाॅर मेमोरियल को देश को समर्पित किया था.



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