सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार का दिन बेहद अहम रहने वाला है. सुप्रीम कोर्ट में 4 अहम मामलों पर सुनवाई होगी. इनमें दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों से जुड़ा मुद्दा, कन्नड़ अभिनेता दर्शन की जमानत रद्द करने पर फैसला, बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से जुड़ी याचिका शामिल हैं. इन मामलों पर अलग-अलग बेंच सुनवाई करेंगी.जिससे देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है.

1. दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों से जुड़ा मामला

मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को सुनवाई के दौरान आश्वासन दिया कि वे आवारा कुत्तों के मामले को देखेंगे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की तत्काल सुनवाई के लिए नई तीन जजों की स्पेशल बेंच बनाई गई है. पहले यह मामला दो जजों की बेंच सुन रही थी, जिसने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराने और स्थाई तौर पर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था. अब जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच गुरुवार को इस पर सुनवाई करेगी.

2. कन्नड़ अभिनेता दर्शन की जमानत रद्द करने पर फैसला

कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कन्नड़ अभिनेता दर्शन को रेणुकास्वामी हत्याकांड में जमानत दी गई थी. अब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना फैसला सुनाएगा. पिछली सुनवाई में जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ जमानत देने का नहीं, बल्कि बरी करने जैसा लगता है और यह विवेक का गलत इस्तेमाल है.

3. बिहार SIR का मामला

बिहार में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को भी सुनवाई होगी.जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे. बागची की बेच ने इस पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई तय की है. अब तक कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, गोपाल शंकरनारायण और शाहदान फरासत जैसे वरिष्ठ वकील याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस कर चुके हैं. गुरुवार को चुनाव आयोग अपनी दलीलें पेश करेगा.

4। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की याचिका पर सुनवाई

CJI जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द लौटाया जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की थी.

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