Varaha Jayanti 2025: जब हिरण्याक्ष दैत्य का वध करने के लिए भगवान ने लिया वराह अवतार, पढ़ें पौराणिक कथा – Varaha jayanti 2025 When lord vishnu took varaha avtar to kill the demon Hiranyaksha mythological belief tvisb


Varaha Jayanti 2025: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है. यह दिन भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह को समर्पित है. इस दिन भक्तजन भगवान वराह की पूजा-अर्चना करते हैं. और पाप से मुक्ति पाने की कामना करते हैं. भगवान विष्णु के वराह अवतार को उद्धारक देवता के रूप में भी जाना जाता है. आइए जानते हैं कि इस साल वराह जयंती कब मनाई जाएगी.

वराहा जयंती की शुभ म्यूहर्ट और तीथी

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस साल वराह जयंती 26 अगस्त को मनाई जाएगी. वराह जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 16 मिनट से 03 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस दिन सुबह 11 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. आप इस अबूझ घड़ी में भी भगवान की पूजा कर सकते हैं.

क्यों भगवान को लेना पड़ा वराह अवतार?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार हिरण्याक्ष नामक राक्षस पृथ्वी का हरण करके उसे पाताल लोक ले गया. हिरण्याक्ष, हिरण्यकश्यप का ही भाई था. तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया और पाताल से पृथ्वी को मुक्त कराया. इसलिए इस दिन को अधर्म के नाश और धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.

वराह जयंती की पूजा विधि

वराह जयंती पर भक्तजन उपवास रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. फिर घर के पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें. भगवान विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद “ॐ वराहाय नमः” या “ॐ श्री वराहाय विष्णवे नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.

इन मंदिरों में होता है विशेष आयोजन

वराह जयंती देश के कई हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है. देश के कुछ मंदिर ऐसे हैं, जहां वराह जयंती पर भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है. भुवराह स्वामी ऐसा ही एक मंदिर है, जो आंध्रप्रदेश के तिरुमला में स्थित है. इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था. वराह जयंती के दिन यहां भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा को नारियल के पानी से स्नान कराया जाता है.

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