गलती से भी आपके पास नहीं आएगी फटकेगी असफलता, ओशो के 4 मंत्र से पाएं हर बार जीत


Osho Quotes: गलती से भी आपके पास नहीं आएगी असफलता! जानें ओशो के 4 सफलता मंत्र, जो हर बार जीत दिलाने में मदद करेंगे. सीखें हार को जीत में बदलने का आसान फॉर्मूला.

ओशो उद्धरण: आपने मिस्टर इंडिया फिल्म में किशोर कुमार द्वारा गाया एक गीत जरूर सुना होगा. ”जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जीत है”. ज्यादातर लोगों के रियल लाइफ वाला फॉर्मूला इसी तरह होता है. इसके लिए कई कहानियां प्रचलित है जो अक्सर स्कूलों में बच्चों को भी नैतिक शिक्षा में भी पढ़ाई जाती है. लेकिन कई बार आपने ऐसे सफल लोगों के भी किस्से सुनें होंगे जहां वह बचपन से ही प्रतिभाशाली था और अंत तक उन्होंने इसे बरकरार रखा, नतीजा ये होता है कि वह बिना किसी बड़ी परेशानी के बड़ी सफलता हासिल कर लेता है. लेकिन कभी आपने सोचा है यह कैसे होता है? यह सब होता है अपनी सोच से. महान दार्शनिक ओशो की मानें तो यह संभव है. आज हम आपको ओशो द्वारा बताये गये उन रास्तों को बताएंगे जहां आप बिना किसी बड़ी असफलता का मुंह देखे बिना कामयाबी हासिल कर सकते हैं.

ओशो का क्या था नजरिया

ओशो कहते थे कि असफलता का सामना करने का तरीका हमारी सोच में छुपा है. उनका मानना है कि हार केवल तब असफलता बनती है जब हम उसे अंतिम निर्णय मान लेते हैं. ओशो कहते थे इंसान को हर छोटी असफलता को अपना शिक्षक बनाना चाहिए और सफलता को केवल उसका परिणाम समझें.” इसका अर्थ है कि जीवन में मिलने वाली हर हार हमें कुछ सिखाती है. अगर हम इसे समझकर आगे बढ़ें, तो कोई भी हार हमें हमेशा के लिए पराजित नहीं कर सकती.

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हार से सीखने के आसान तरीके

  1. किसी भी चीज में छोटी सी असफलता का आत्ममंथन करें
    ओशो के अनुसार इंसान को हर छोटी हार से कुछ नया सीख चाहिए. चाहे वह कोई छोटी सी प्रतियोगिता है या फिर क्लास का यूनिट टेस्ट. अपने अनुभवों का विश्लेषण करें और सुधार के रास्ते ढूंढे.
  2. नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण
    ओशो का मानना था कि किसी भी हार के बाद डर और निराशा को अपने मन में पनपने न देना चाहिए. क्योंकि डर आत्मविश्वास को खत्म कर देता है. बेहतर है कि हर चीज का डट कर सामना करना सीखें.
  3. हार को अस्थायी समझें
    कोई भी छोटी सी असफलता भी हमें एक अनुभव देती है. इसे अंतिम परिणाम न समझकर उसे खुशी से अपनाएं और आगे बढ़ें.
  4. अंदरूनी शक्ति विकसित करें
    असली जीत बाहरी परिणामों में नहीं, बल्कि अपने डर और नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण पाने में है.

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